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Never Take Any Medicine Without Prescription – खुद न बनें डॉक्टर, बगैर परामर्श न खाए दवाएं, विश्व किडनी दिवस पर कार्यशाला में चिकित्सकों ने दी सलाह


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लोग खुद डॉक्टर न बनें। बिना डॉक्टर के परामर्श के दवा लेना उनकी सेहत के लिए घातक हो सकता है। कोई बीमारी होने पर दवा लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। ये दवाएं शरीर के अन्य अंगों के साथ किडनी तक को नुकसान पहुंचाती हैं। किडनी फेल्योर के 10-20 फ ीसद मामलों का कारण दवाओं का दुष्प्रभाव ही है। यह जानकारी लोहिया संस्थान में नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अभिलाष चंद्रा ने दी। विश्व किडनी दिवस पर संस्थान में हुए जागरूकता कार्यक्रम में बोल रहे थे।
डॉ. अभिलाष चन्द्रा ने बताया कि दवाओं का प्रभाव किडनी और लिवर पर ही पड़ता है। दर्द निवारक दवाओं का सबसे अधिक दुष्प्रभाव गुर्दे पर ही पड़ता है। कुछ एंटीबायोटिक दवाएं भी गुर्दों को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाती हैं। डॉ. चन्द्रा ने बताया कि लंबे समय तक गैस की दवा खाने से किडनी खराब होती है। इससे बचने के लिए हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही दवाओं का सेवन करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं। वजन नियंत्रित रखें और व्यायाम नियमित रूप से करें। व्यायाम करने से ब्लड प्रेशर व शुगर जैसी बीमारियों भी नहीं होती। उन्होंने बताया कि खून और पेशाब की जांच से गुर्दे की समस्याओं का पता चल जाता है। चालीस साल की उम्र पार करने वाले साल में कम से कम एक बाद गुर्दे की जांच जरूर कराएं। इस मौके पर गुर्दा प्रत्यारोपण करा चुके मरीज के तीमारदारों ने अनुभव साझा किए।

लोग खुद डॉक्टर न बनें। बिना डॉक्टर के परामर्श के दवा लेना उनकी सेहत के लिए घातक हो सकता है। कोई बीमारी होने पर दवा लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। ये दवाएं शरीर के अन्य अंगों के साथ किडनी तक को नुकसान पहुंचाती हैं। किडनी फेल्योर के 10-20 फ ीसद मामलों का कारण दवाओं का दुष्प्रभाव ही है। यह जानकारी लोहिया संस्थान में नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अभिलाष चंद्रा ने दी। विश्व किडनी दिवस पर संस्थान में हुए जागरूकता कार्यक्रम में बोल रहे थे।

डॉ. अभिलाष चन्द्रा ने बताया कि दवाओं का प्रभाव किडनी और लिवर पर ही पड़ता है। दर्द निवारक दवाओं का सबसे अधिक दुष्प्रभाव गुर्दे पर ही पड़ता है। कुछ एंटीबायोटिक दवाएं भी गुर्दों को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाती हैं। डॉ. चन्द्रा ने बताया कि लंबे समय तक गैस की दवा खाने से किडनी खराब होती है। इससे बचने के लिए हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही दवाओं का सेवन करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं। वजन नियंत्रित रखें और व्यायाम नियमित रूप से करें। व्यायाम करने से ब्लड प्रेशर व शुगर जैसी बीमारियों भी नहीं होती। उन्होंने बताया कि खून और पेशाब की जांच से गुर्दे की समस्याओं का पता चल जाता है। चालीस साल की उम्र पार करने वाले साल में कम से कम एक बाद गुर्दे की जांच जरूर कराएं। इस मौके पर गुर्दा प्रत्यारोपण करा चुके मरीज के तीमारदारों ने अनुभव साझा किए।



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