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No Action Against Who Responsible For Scam In Lda – एलडीए में भूखंड घोटाला करने वाले असली जिम्मेदार कार्रवाई से दूर


भूखंड आवंटन घोटाले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं।
– फोटो : ??? ?????

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करीब 500 भूखंडों के रिकॉर्ड बदलकर एलडीए में सबसे बड़ा भूखंड आवंटन घोटाला करने वाले असली जिम्मेदार अब भी कार्रवाई से दूर हैं।
एलडीए और पुलिस अधिकारी भले ही कड़ी कार्रवाई का दावा करें, मगर हकीकत यही है कि असली जिम्मेदारों पर कार्रवाई अब भी शुरू नहीं हो सकी है।
एलडीए का सर्वर का काम देखने वाली हार्डवेयर सेवा प्रदाता कंपनी के खिलाफ तो एफआईआर हो गई। वहीं जिस सॉफ्टवेयर से रिकॉर्ड बदले गए, उसकी खामियों के लिए जिम्मेदार सॉफ्टवेयर का रखरखाव करने वाली कंपनी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
एलडीए के कंप्यूटर सेक्शन के अधिकारियों के मुताबिक हार्डवेयर और सर्वर की जिम्मेदारी एक्मे डिजिटेक और सॉफ्टवेयर की जिम्मेदारी पीसीएस मैनेजमेंट कंसल्टेंसी की है।
ऐसे में सर्वर पर मौजूद डाटा के रखरखाव की जिम्मेदारी एक्मे डिजिटेक की हुई। वहीं जिस सॉफ्टवेयर या वेब पोर्टल के जरिए संपत्तियों के डाटा को अपडेट रखा जाता है। उसका रखरखाव पीसीएस के पास है।
अभी तक केवल एक्मे डिजिटेक के खिलाफ ही एफ आईआर हुई है। वहीं जांच कर रहे एसीपी विवेक रंजन राय का कहना है कि पीसीएस के अधिकारियों से भी पूछताछ की गई है। हालांकि, जांच में क्या निकला? इसको लेकर अभी तक कोई अपडेट एलडीए के पास नहीं है।
बाबू अभी तक फरार
एलडीए की तरफ से हुई एफआईआर में सबसे पहले बाबू अजय वर्मा का नाम आया था। करीब छह महीने बाद भी बाबू से न पूछताछ हो सकी है, न उसे हिरासत में लिया जा सका। किसी भी जांच में बाबू अभी तक शामिल भी नहीं हुआ है।
आईपी सुरक्षित नहीं करने पर क्यों नहीं उठे सवाल?
जब रिकॉर्ड बदलने वाले कंप्यूटर का आईपी सुरक्षित सॉफ्टवेयर पर नहीं था। ऐसे में सॉफ्टवेयर का रखरखाव करने वाली एजेंसी पर सवाल क्यों नहीं उठाए? जब ओटीपी बाइपास हो रहा था, इसको लेकर कंप्यूटर सेक्शन या सॉफ्टवेयर का काम देखने वाली एजेंसी ने क्यों शिकायत नहीं की? सीधेे तौर पर यह बड़े स्तर की साठगांठ की तरफ इशारा है।
50 में से सिर्फ तीन फाइलें ही मिलीं
जांच की हालत भी ऐसी है कि जिन 50 भूखंडों के रिकॉर्ड बदलने की शिकायत सिस्टम एग्जीक्यूटिव एसबी भटनागर ने की। उसमें से जांच अधिकारी व संयुक्त सचिव को सिर्फ तीन फाइलें ही मिली हैं। इतने ही भूखंड के दावेदारों ने एलडीए में संपर्क किया है। बाकी 47 फाइलें अब भी मिसिंग हैं। वहीं बाकी 450 फाइलों की जांच भी करनी होगी।
क्या दोबारा सीबीआई जांच की जरूरत?
एलडीए के सबसे बड़े भूखंड आवंटन घोटाले में अब सीबीआई जांच की ही जरूरत महसूस होने लगी है। इससे पहले जानकीपुरम योजना में भी शासन को सीबीआई जांच ही करानी पड़ी थी।
जांच में कर रहा सहयोग
सिस्टम एग्जीक्यूटिव, एलडी, एसबी भटनागर ने बताया कि मैंने खुद आगे आकर 50 भूखंड के रिकॉर्ड मेरी यूजर आईडी का उपयोग कर बदले जाने की शिकायत की थी। मैं शुरू से जांच में सहयोग कर रहा हूं। हर बिन्दु पर जानकारी जांच अधिकारी को दी है। सिक्योरिटी ऑडिट कराने के लिए भी प्रक्रिया शुरू कराई है।
एलडीए विभागीय जांच पूरी कर चुका
सचिव पवन गंगवार ने बताया कि एलडीए अपनी विभागीय जांच पूरी कर चुका है। हमने एफआईआर भी इस मामले में कराई हैं। पुलिस से भी लगातार रिपोर्ट ली जा रही है कि जांच में क्या मिल रहा? जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी। अभी आगे और भी कार्रवाई होंगीं।
दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी
एसीपी साइबर क्राइम, विवेक रंजन राय ने बताया कि सर्वर के बाद सॉफ्टवेयर के एडमिन पीसीएस और प्राधिकरण के कंप्यूटर सेक्शन के अधिकारियों से पूछताछ की गई है। चार से पांच जिम्मेदार हमारी जांच के दायरे में हैं। जांच चल रही है। जल्दी ही कंप्यूटर रिकॉर्ड बदलने के दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

करीब 500 भूखंडों के रिकॉर्ड बदलकर एलडीए में सबसे बड़ा भूखंड आवंटन घोटाला करने वाले असली जिम्मेदार अब भी कार्रवाई से दूर हैं।

एलडीए और पुलिस अधिकारी भले ही कड़ी कार्रवाई का दावा करें, मगर हकीकत यही है कि असली जिम्मेदारों पर कार्रवाई अब भी शुरू नहीं हो सकी है।

एलडीए का सर्वर का काम देखने वाली हार्डवेयर सेवा प्रदाता कंपनी के खिलाफ तो एफआईआर हो गई। वहीं जिस सॉफ्टवेयर से रिकॉर्ड बदले गए, उसकी खामियों के लिए जिम्मेदार सॉफ्टवेयर का रखरखाव करने वाली कंपनी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

एलडीए के कंप्यूटर सेक्शन के अधिकारियों के मुताबिक हार्डवेयर और सर्वर की जिम्मेदारी एक्मे डिजिटेक और सॉफ्टवेयर की जिम्मेदारी पीसीएस मैनेजमेंट कंसल्टेंसी की है।

ऐसे में सर्वर पर मौजूद डाटा के रखरखाव की जिम्मेदारी एक्मे डिजिटेक की हुई। वहीं जिस सॉफ्टवेयर या वेब पोर्टल के जरिए संपत्तियों के डाटा को अपडेट रखा जाता है। उसका रखरखाव पीसीएस के पास है।

अभी तक केवल एक्मे डिजिटेक के खिलाफ ही एफ आईआर हुई है। वहीं जांच कर रहे एसीपी विवेक रंजन राय का कहना है कि पीसीएस के अधिकारियों से भी पूछताछ की गई है। हालांकि, जांच में क्या निकला? इसको लेकर अभी तक कोई अपडेट एलडीए के पास नहीं है।

बाबू अभी तक फरार

एलडीए की तरफ से हुई एफआईआर में सबसे पहले बाबू अजय वर्मा का नाम आया था। करीब छह महीने बाद भी बाबू से न पूछताछ हो सकी है, न उसे हिरासत में लिया जा सका। किसी भी जांच में बाबू अभी तक शामिल भी नहीं हुआ है।

आईपी सुरक्षित नहीं करने पर क्यों नहीं उठे सवाल?

जब रिकॉर्ड बदलने वाले कंप्यूटर का आईपी सुरक्षित सॉफ्टवेयर पर नहीं था। ऐसे में सॉफ्टवेयर का रखरखाव करने वाली एजेंसी पर सवाल क्यों नहीं उठाए? जब ओटीपी बाइपास हो रहा था, इसको लेकर कंप्यूटर सेक्शन या सॉफ्टवेयर का काम देखने वाली एजेंसी ने क्यों शिकायत नहीं की? सीधेे तौर पर यह बड़े स्तर की साठगांठ की तरफ इशारा है।

50 में से सिर्फ तीन फाइलें ही मिलीं

जांच की हालत भी ऐसी है कि जिन 50 भूखंडों के रिकॉर्ड बदलने की शिकायत सिस्टम एग्जीक्यूटिव एसबी भटनागर ने की। उसमें से जांच अधिकारी व संयुक्त सचिव को सिर्फ तीन फाइलें ही मिली हैं। इतने ही भूखंड के दावेदारों ने एलडीए में संपर्क किया है। बाकी 47 फाइलें अब भी मिसिंग हैं। वहीं बाकी 450 फाइलों की जांच भी करनी होगी।

क्या दोबारा सीबीआई जांच की जरूरत?

एलडीए के सबसे बड़े भूखंड आवंटन घोटाले में अब सीबीआई जांच की ही जरूरत महसूस होने लगी है। इससे पहले जानकीपुरम योजना में भी शासन को सीबीआई जांच ही करानी पड़ी थी।

जांच में कर रहा सहयोग

सिस्टम एग्जीक्यूटिव, एलडी, एसबी भटनागर ने बताया कि मैंने खुद आगे आकर 50 भूखंड के रिकॉर्ड मेरी यूजर आईडी का उपयोग कर बदले जाने की शिकायत की थी। मैं शुरू से जांच में सहयोग कर रहा हूं। हर बिन्दु पर जानकारी जांच अधिकारी को दी है। सिक्योरिटी ऑडिट कराने के लिए भी प्रक्रिया शुरू कराई है।

एलडीए विभागीय जांच पूरी कर चुका

सचिव पवन गंगवार ने बताया कि एलडीए अपनी विभागीय जांच पूरी कर चुका है। हमने एफआईआर भी इस मामले में कराई हैं। पुलिस से भी लगातार रिपोर्ट ली जा रही है कि जांच में क्या मिल रहा? जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी। अभी आगे और भी कार्रवाई होंगीं।

दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी

एसीपी साइबर क्राइम, विवेक रंजन राय ने बताया कि सर्वर के बाद सॉफ्टवेयर के एडमिन पीसीएस और प्राधिकरण के कंप्यूटर सेक्शन के अधिकारियों से पूछताछ की गई है। चार से पांच जिम्मेदार हमारी जांच के दायरे में हैं। जांच चल रही है। जल्दी ही कंप्यूटर रिकॉर्ड बदलने के दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।



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