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On Shravani Ekadashi 18, we worship Lord Vishnu and Peepal on this day with the wish of good health and progress of the children. | श्रावणी एकादशी 18 को संतान की अच्छी सेहत और उन्नति की कामना से इस दिन करते हैं भगवान विष्णु और पीपल की पूजा


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18 घंटे पहले

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  • श्रावण महीने की एकादशी पर भगवान विष्णु और शिवजी की पूजा के साथ कन्या भोजन करवाने से दूर होती है संतान की परेशानियां

सावन महीने के शुक्लपक्ष में आने वाली एकादशी को पवित्रा या पुत्रदा एकादशी कहते हैं। ये व्रत संतान पाने के लिए किया जाता है। वहीं, कुछ लोग संतान की उन्नति और अच्छी सेहत की कामना से भी ये व्रत करते हैं। इस व्रत से भगवान विष्णु और लक्ष्मीजी दोनों प्रसन्न होते हैं। जिससे घर में सुख-शांति और समृद्धि बढ़ती है। इस व्रत में पीपल और तुलसी पूजा की भी परंपरा है। ऐसा करने से हर तरह के दोष भी खत्म होते हैं।

श्रावणी एकादशी व्रत
संतान पाने की इच्छा से जो लोग व्रत रखते हैं उन्हें बिना कुछ खाए पिए पूरे संयम और नियम से रहना चाहिए। सुबह जल्दी उठकर भगवान विष्णु की पूजा के बाद दिनभर व्रत और श्रद्धानुसार दान का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद पीपल और तुलसी पूजा कर के जल चढ़ाएं। फिर दिनभर में कभी भी ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को भोजन करवाएं। फिर द्वादशी के दिन व्रत का पारणा करें।

पीपल के पेड़ की पूजा
जिन दंपतियों की संतान पैदा होने के बाद मृत हो जाती हो या स्त्री का गर्भपात हो जाता हो वे इस एकादशी के दिन व्रत करें। सुबह ब्रह्ममुहूर्त में किसी पीपल के पेड़ के पास जाकर उसकी जड़ में चांदी के लोटे से कच्चे दूध में मिश्री मिलाकर चढ़ाएं। पीपल के तने पर सात बार मौली लपेटकर संतान की अच्छी सेहत की प्रार्थना करें।

कन्या भोजन
बच्चे बीमार रहने लगे या उन्हें किसी भी तरह की परेशानी होने पर पुत्रदा एकादशी का व्रत किया जाता है। साथ ही 11 कन्याओं को भोजन करवाया जा सकता है। श्रद्धा के मुताबिक उन्हें कपड़े या कोई गिफ्ट भी दें। ऐसा करने से संतान की करियर संबंधी रुकावटें भी दूर होती है। इस एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ शिव परिवार के पूजन की भी परंपरा है। इस दिन भगवान विष्णु के मंदिर में घी का दान करें और शिव मंदिर में मावे की मिठाई का दान करें और शिवजी का अभिषेक भी करें।

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