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Pisarikkal Bhagavathi Temple, which is more than 1000 years old, is one of the 108 Devi shrines in the state. | 1000 साल से ज्यादा पुराना है पिसरिक्कल भगवथी मंदिर, राज्य के 108 देवी तीर्थों में एक है


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8 घंटे पहले

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  • मान्यता: यहां का प्रसाद खाने से दूर होता है कष्ट, दवा के रूप में लिया जाता है प्रसाद

केरल के चालकुडी में मौजूद पिसरिक्कल भगवथी मंदिर करीब हजार साल पुराना है। ये तीर्थ केरल के 108 दुर्गा मंदिरों की सूची में शामिल है। इस मंदिर में वानदुर्गा और भगवती की दो मुख्य मूर्तियां शामिल हैं। आमतौर पर सभी भक्त इन्हें भद्रकाली अम्मन कहते हैं। ये मंदिर पूरी तरह से दैवीय आभा से हर जगह से घिरा हुआ है। पहाड़ी से गिरते झरने के नीचे रखी देवी दुर्गा की मूर्ति को देखकर लगता है कि प्रकृति, देवी का जलाभिषेक कर रही हो। शक्ति के इस मंदिर में भक्त समृद्धि, सेहत, ज्ञान और शांति की इच्छा से यहां आते हैं।

नवरात्रि पर होती है विशेष पूजा
मुख्य मूर्ति के हाथ में शंख और चक्र है। अम्मन की प्रतिमा के अलावा, यहां भगवान शिव और गणपति की मूर्ति भी स्थापित है। मार्च-अप्रैल के दौरान यहां सालाना त्योहार मीनम भव्य तरीके से मनाया जाता है। त्योहार के आठवें दिन लड़कियां तेल के दीपक, फूल और हल्दी से देवी की पूजा करती हैं। इसके अलवा यहां नवरात्रि के मौके पर विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां सुबह 4 से शाम 5 बजे तक ही दर्शन किए जा सकते हैं।

प्रसाद खाने से दूर होता है कष्ट
ऐसा माना जाता है कि एक प्रसिद्ध संत ने अपनी सिद्धि को माता को समर्पित कर दिया था, जिससे सांप के काटने के जहर का असर खत्म हो जाता था। इस वजह से इसे विष हरिक्कल अम्मा से भी जाना जाता था। जो बाद में बदलकर पिसरिक्कल हो गया। अभी भी यहां के प्रसाद का उपयोग दवा के रूप में किया जाता है। मलायम कलैंडर के थूलम महीने में आने वाली अमावस्या को दोपहर में यहां स्नान और दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है, जिसे ववरावृत्त कहा जाता है।

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