Most Popular

Social Media

Get The Latest Updates

Subscribe To Our Weekly Newsletter

No spam, notifications only about new products, updates.

Ramdev wants to spread fear of vaccines to sell his medicine | डॉक्टर जयेश लेले बोले- 25 सवाल एक अनपढ़ आदमी हमसे पूछ रहा, मजे की बात इनमें सारे एलौपेथी़ डिजीज के नाम आयुर्वेदिक एक भी नहीं


Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

नई दिल्लीएक घंटा पहलेलेखक: पवन कुमार

  • कॉपी लिंक
IMA के महासचिव डॉ.जयेश लेले (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar

IMA के महासचिव डॉ.जयेश लेले (फाइल फोटो)

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के महासचिव डॉ.जयेश लेले का कहना है कि बाबा रामदेव वैक्सीन के बावजूद डॉक्टरों की मौत की बात कहकर लोगों में टीके के प्रति डर फैलाना चाहते हैं। यह सरकारी टीकाकरण को पटरी से उतारने का तरीका है। भास्कर से उन्होंने विशेष बातचीत की। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश-

रामदेव 25 लाइफस्टाइल डिजीज का इलाज एलोपैथी में न होने का दावा करते हैं
25 सवाल एक अनपढ़ आदमी हमसे पूछ रहा है। हम जवाब देंगे, विश्व भर का रेफरेंस देते हुए जवाब तैयार करेंगे लेकिन उसे नहीं देंगे देश के लोगों के लिए वेबसाइट पर अपलोड करेंगे। मजे की बात है कि जिन 25 लाइफस्टाइल डिजीज का नाम लिखा है वे सब एलोपैथी नाम है। आयुर्वेदिक नाम नहीं लिखा।

सवाल: बाबा कह रहे हैं कि एलोपैथी से सिर्फ 10% गंभीर मरीज ठीक हुए, आपका क्या कहेंगे?
यह बिल्कुल गलत है। एलोपैथी से 2.30 करोड़ से ज्यादा मरीज ठीक हुए। गंभीर मरीजों का आंकड़ा अलग से देखना चाहिए। रामदेव के अनुसार 90% मरीजों का इलाज आयुर्वेद से हुआ है तो प्रमाण दिखाएं नहीं तो झूठा बयान न दें।

सवाल: बाबा रामदेव को ताकत कहां से मिलती है कि इतने दम से अपनी बात रखते हैंं?
यह सरकार को सोचना चाहिए। 10 हजार डॉक्टर्स की मौत टीका लेने के बाद हो गई ऐसे बयान दे रहे हैं। यह तरीका है सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम को पटरी से उतारने का। रामदेव का बयान एलोपैथी दवा और टीके के प्रति डर फैलाने के लिए है ताकि उन्हें दवा बेचने का मौका मिल जाए।

सवाल: क्या आप बाबा रामदेव पर राजद्रोह के मुकदमे की मांग पर कायम हैं?
रामदेव के खिलाफ आपदा प्रबंधन एक्ट, आईपीसी की धाराओं और राजद्रोह के तहत मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। बाबा रामदेव की दवा को कोरोना के इलाज के लिए इजाजत मिली है, यह साबित करना चाहिए। रामदेव ने अपनी आयुर्वेदिक दवा का आयुर्वेद अस्पताल की जगह जयपुर के एलोपैथी अस्पताल में क्यों ट्रायल किया यह भी बताना चाहिए।

सवाल: कोरोना ट्रीटमेंट का प्रोटोकॉल बदल रहा है। क्या इसमें आयुर्वेद या पद्धति को शामिल किया जाना चाहिए?
दिशा-निर्देश तैयार करने का काम सरकार और आईसीएमआर का है। सरकार जो दिशा-निर्देश तैयार करती है वह वैज्ञानिक आधार पर होता है। आयुर्वेद अपनी जगह पर और एलोपैथी अपनी जगह पर है। आयुर्वेद के लिए हमारे मन में कोई आशंका नहीं है।

सवाल: कोविड ट्रीटमेंट के साइड इफेक्ट्स दिखे हैं। ब्लैक फंगस महामारी बन रहा है। ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल में चूक हुई है?
नहीं। हर दवाई का साइड इफेक्ट और एडवर्स इफेक्ट नॉर्मल है। स्टेरॉयड का ब्लैक फंगस से कोई लेना-देना नहीं है। पिछले वर्ष स्टेरॉयड दी जा रही थी लेकिन ऐसी स्थिति नहीं हुई थी। इस वर्ष भी अंतिम 20 दिनों में देखा गया जब इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन सिलेंडर मेडिकल ऑक्सीजन के तौर पर इस्तेमाल किया जाने लगा। सिलेंडर क्लीन करना उनका काम था।

खबरें और भी हैं…



Source link

Share:

Share on facebook
Share on twitter
Share on pinterest
Share on linkedin
Share on whatsapp

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *