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Recommendation Of Departmental Proceedings Against Suspended Ips – निलंबित आईपीएस के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की सिफारिश


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विजिलेंस ने भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित आईपीएस अधिकारी अभिषेक दीक्षित के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की सिफारिश की है। इस संबंध में पिछले दिनों गृह विभाग को रिपोर्ट भेजी गई थी। सूत्रों का कहना है कि दीक्षित पर लगे आरोपों में ऐसे तथ्य नहीं मिले हैं, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाए। 

गौरतलब है कि अभिषेक दीक्षित को भ्रष्टाचार के आरोप में प्रयागराज के एसएसपी के पद से पिछले साल 8 सितंबर को निलंबित कर दिया गया था। इसके अगले दिन महोबा के एसपी मणिलाल पाटीदार को भी निलंबित करते हुए इन दोनों मामलों की जांच विजिलेंस को सौंपी गई थी। पाटीदार पर एक कारोबारी को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज है और वह फरार हैं। 

अभिषेक दीक्षित पर अधिकारियों के आदेश को न मानना, जांच में लापरवाही, स्टेनों को तबादले के बाद पिछली तिथियों में छुट्टी देना और थानेदारों की तैनाती में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। इस मामले में विजिलेंस ने उनसे दो बार पूछताछ की। इसमें उन्होंने आरोपों से इनकार किया और 300 पन्नों में सभी बिंदुओं पर लिखित जवाब दिया। सूत्रों का कहना है कि विजिलेंस ने जांच पाया कि प्रयागराज के एसएसपी रहते दीक्षित को जो जांच सौंपी गई, उसकी सही से जांच नहीं गई।

वहीं, दीक्षित ने प्रशासनिक आधार पर गैर जनपद में स्थानांतरित किए गए स्टेनो को पिछली तिथियों में छुट्टी देकर स्थानांतरण को रुकवाने का मौका दिया। उन्हें थानेदारों की तैनाती में नियमों को नजरअंदाज करने का दोषी पाया किया है। हालांकि तैनाती में पैसे लेने के साक्ष्य नहीं मिले हैं। 

 

विजिलेंस ने भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित आईपीएस अधिकारी अभिषेक दीक्षित के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की सिफारिश की है। इस संबंध में पिछले दिनों गृह विभाग को रिपोर्ट भेजी गई थी। सूत्रों का कहना है कि दीक्षित पर लगे आरोपों में ऐसे तथ्य नहीं मिले हैं, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाए। 

गौरतलब है कि अभिषेक दीक्षित को भ्रष्टाचार के आरोप में प्रयागराज के एसएसपी के पद से पिछले साल 8 सितंबर को निलंबित कर दिया गया था। इसके अगले दिन महोबा के एसपी मणिलाल पाटीदार को भी निलंबित करते हुए इन दोनों मामलों की जांच विजिलेंस को सौंपी गई थी। पाटीदार पर एक कारोबारी को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज है और वह फरार हैं। 

अभिषेक दीक्षित पर अधिकारियों के आदेश को न मानना, जांच में लापरवाही, स्टेनों को तबादले के बाद पिछली तिथियों में छुट्टी देना और थानेदारों की तैनाती में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। इस मामले में विजिलेंस ने उनसे दो बार पूछताछ की। इसमें उन्होंने आरोपों से इनकार किया और 300 पन्नों में सभी बिंदुओं पर लिखित जवाब दिया। सूत्रों का कहना है कि विजिलेंस ने जांच पाया कि प्रयागराज के एसएसपी रहते दीक्षित को जो जांच सौंपी गई, उसकी सही से जांच नहीं गई।

वहीं, दीक्षित ने प्रशासनिक आधार पर गैर जनपद में स्थानांतरित किए गए स्टेनो को पिछली तिथियों में छुट्टी देकर स्थानांतरण को रुकवाने का मौका दिया। उन्हें थानेदारों की तैनाती में नियमों को नजरअंदाज करने का दोषी पाया किया है। हालांकि तैनाती में पैसे लेने के साक्ष्य नहीं मिले हैं। 

 



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