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Shani Jayanti 2021 10th June Durlabh Yog | Grah Planetary Positions Shani (Saturn) In Capricorn Makar Rashi, Surya Chandra Budha Rahu In Taurus Vrash Rashi | 148 साल बाद शनि जयंती पर सूर्यग्रहण, अपनी ही राशि में वक्री शनि देश के लिए शुभ


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  • Shani Jayanti 2021 10th June Durlabh Yog | Grah Planetary Positions Shani (Saturn) In Capricorn Makar Rashi, Surya Chandra Budha Rahu In Taurus Vrash Rashi

19 घंटे पहले

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  • स्कंदपुराण के मुताबिक राजा दक्ष की बेटी की छाया के पुत्र होने की वजह से काला है शनिदेव का रंग

आज ज्येष्ठ महीने की अमावस्या होने से शनि जयंती मनाई जाएगी। ज्योतिष ग्रंथों के मुताबिक ये अमावस्या केतु ग्रह की भी जन्म तिथि है। इस साल शनि जयंती पर ग्रहों की खास स्थिति बन रही है। इस बार वृष राशि में सूर्य, बुध, चंद्रमा और राहु के होने से चतुर्ग्रही योग बन रहा है। आज शनि जयंती पर सूर्यग्रहण होने से सूर्य-शनि यानी पिता-पुत्र का दुर्लभ योग भी बन रहा है। ग्रहों की शुभ स्थिति का असर देश पर पड़ेगा।

दुर्लभ ग्रह स्थिति का देश पर असर
ज्योतिषाचार्य डॉ. मृत्युंजय तिवारी का कहना है कि 148 साल बाद शनि जयंती पर सूर्यग्रहण हो रहा है। इससे पहले 26 मई 1873 को ऐसा संयोग बना था। लेकिन आज होने वाला सूर्यग्रहण भारत में नहीं दिखेगा इसलिए इसका अशुभ असर भी नहीं होगा।

डॉ. तिवारी बताते हैं कि शनि जयंती पर शनि खुद की राशि मकर में वक्री रहेगा। यानी टेढ़ी चाल से चल रहा है। शनि श्रवण नक्षत्र में है। इस स्थिति से देश में न्याय और धर्म बढ़ेगा। प्राकृतिक आपदाओं और महामारी से जीतकर भारत एक ताकवर देश के रूप में उभरेगा। देश में धार्मिक गतिविधियां बढ़ेंगी। मजदूर वर्ग और नीचले स्तर पर काम करने वाले लोगों के लिए अच्छा समय शुरू होगा। खेती को बढ़ावा मिलेगा। अनाज और खाने की अन्य चीजों का उत्पादन भी बढ़ेगा।

शनि जयंती पर वृष राशि में सूर्य, चंद्र, बुध और राहु एक साथ रहेंगे। इन 4 ग्रहों के कारण देश की अर्थव्यवस्था बढ़ेगी। देश की कानून व्यवस्था और व्यापारिक नीतियों में बदलाव होगा।विश्व में भारत की प्रसिद्धि बढ़ेगी। विश्व के दूसरे देश भारत को सहयोग करेंगे। बड़े प्रशासनिक पदों की जिम्मेदारी निभा रही महिलाओं का प्रभाव बढ़ेगा।

स्कंदपुराण के अनुसार शनि का जन्म
स्कंदपुराण के काशीखंड की कथा के अनुसार राजा दक्ष की पुत्री संज्ञा का विवाह सूर्यदेवता के साथ हुआ। इसके बाद संज्ञा ने वैवस्वत मनु, यमराज और यमुना को जन्म दिया। सूर्य का तेज ज्यादा होने से संज्ञा परेशान थी। संज्ञा अपनी छाया सूर्य के पास छोड़कर तपस्या करने चली गई। ये बात सूर्य को पता नहीं थी। इसके बाद छाया और सूर्य से भी 3 संतान हुई। जो कि शनिदेव, मनु और भद्रा (ताप्ती नदी) थी। छाया पुत्र होने से शनिदेव का रंग काला है। जब सूर्य देव को छाया के बारे में पता चला तो उन्होंने छाया को श्राप दे दिया। इसके बाद शनिदेव और सूर्य पिता-पुत्र होने के बाद भी एक-दूसरे के शत्रु हो गए।

ज्योतिष में शनि
9 ग्रहों में शनि 7वां ग्रह है। ये बहुत धीरे-धीरे चलने वाला ग्रह है। ये एक राशि में करीब 30 महीने यानी ढाई साल तक रहता है। कुंभ और मकर राशि वाले लोगों पर शनि पूरा प्रभाव रहता है। क्योंकि ये शनि की ही राशियां है। शनि को क्रूर और न्याय का ग्रह माना जाता है। ये अच्छे और बुरे कामों का फल देर से देता है लेकिन इसका असर बहुत ज्यादा प्रभावशाली होता है। शनि के अच्छे फल से नौकरी और बिजनेस में तरक्की, प्रॉपर्टी, धन लाभ और राजनीति में बड़ा पद मिलता है। शनि के अशुभ प्रभाव से कर्जा, चोट, दुर्घटना, रोग, धन हानि, जेल, विवाद होने लगते हैं। इसके कारण अपने ही लोगों से दूरी बढ़ जाती है।

तेल चढ़ाएं, काले तिल और उड़द का दान करें
शास्त्रों के अनुसार जहां सभी देवी- देवताओं की पूजा सुबह होती है वहीं शाम को शनिदेव की पूजा करने का महत्व ज्यादा है। शनि जयंती पर्व पर भगवान शनिदेव को तिल का तेल चढ़ाना चाहिए। इसके साथ ही काला कपड़ा भी चढ़ाएं। शमी पेड़ के पत्ते और अपराजिता के नीले फूल खासतौर से इनकी पूजा में शामिल करना चाहिए। तिल, उड़द, काला कंबल, बादाम, लोहा, कोयला इन वस्तु ओं पर शनि का प्रभाव होता है। इसलिए शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए संध्या के समय इनका दान करना चाहिए।

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