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Shatabdi Express Ignore For Tezas Express – तेजस एक्सप्रेस के लिए शताब्दी की हो रही अनदेखी


शताब्दी से यात्रियों का हो रहा मोहभंग।
– फोटो : ??? ?????

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लखनऊ जंक्शन से नई दिल्ली के बीच चलने वाली शताब्दी एक्सप्रेस का इतिहास गौरवमयी रहा है। इसने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। दूसरी सबसे तेज दौड़ने वाली ये शताब्दी आईएसओ प्रमाणित भी है।
देश में पहली बार एलएचबी बोगियों का ट्रायल भी शताब्दी एक्सप्रेस में ही हुआ है। पर, तेजस एक्सप्रेस को सफल बनाने के लिए अब शताब्दी पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसके चलते ही यात्री शताब्दी से मुंह मोड़ने लगे हैं।
नवंबर 1988 में तत्कालीन रेलमंत्री माधवराव सिंधिया के कार्यकाल में शताब्दी एक्सप्रेस चलाने का खाका तैयार किया गया। योजना थी कि मेट्रो सिटी को शताब्दी से जोड़ा जाए। खाका जमीन पर उतारा गया।
देशभर में 24 जोड़ी से अधिक शताब्दी अब तक पटरी पर उतर चुकी हैं। इसमें लखनऊ जंक्शन से नई दिल्ली के बीच चलने वाली स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस (02003/04) पहले कानपुर व नई दिल्ली के बीच चलती थी।
पर, जब 1993 में आमान परिवर्तन (गेज कन्वर्जन) हुआ तो ट्रेन का दायरा बढ़ाकर यूपी की राजधानी लखनऊ तक कर दिया गया।
रेलवे विशेषज्ञ एसके शर्मा ने बताया कि साल 2001 के आसपास यह ट्रेन लखनऊ मंडल को मिली। पहले इसका संचालन उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के पास था, लेकिन इसे नई दिल्ली से चारबाग लाने और फिर उसे वापस रवाना करने में दिक्कतें होती थीं।
शताब्दी एक्सप्रेस लखनऊ मंडल की शान रही है। इस ट्रेन की एक-एक सीट के लिए मारामारी होती थी। चूंकि, पूरी ट्रेन चेयरकार है, इसलिए यात्री दिन के दिन दिल्ली पहुंच जाते हैं, लेकिन स्थिति अब यह हो गई है कि शताब्दी में सुविधाएं घटा दी गई हैं और किराया महंगा कर दिया गया है।
इसलिए यात्री कतरा रहे हैं। पहले ट्रेन के किराए में खानपान शामिल था, अब अलग से पैसा देना पड़ता है। यही नहीं, डायनेमिक फेयर की वजह से किराया भी काफी बढ़ जाता है, जो यात्रियों को रास नहीं आता।
…और जंक्शन पर शिफ्ट हो गई शताब्दी
शताब्दी एक्सप्रेस पहले चारबाग रेलवे स्टेशन से नई दिल्ली के बीच चलती थी। लेकिन बाद में इसे एक योजना के अंतर्गत लखनऊ जंक्शन पर शिफ्ट कर दिया गया। लखनऊ से चलने व टर्मिनेट होने वाली गाड़ियों को जंक्शन पर शिफ्ट करने का खाका बनाया गया, जिसके बाद से यह जंक्शन से चल रही है। पहले इसमें परंपरागत कोच लगते थे।
दूसरी सबसे तेज शताब्दी
लखनऊ जंक्शन नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस देशभर में दौड़ रही शताब्दी में रफ्तार के मामले में दूसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस है। जो 155 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती है। जबकि अपनी शताब्दी एक्सप्रेस 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है। यही वजह है कि लखनऊ से दिल्ली महज 6.45 घंटे में यात्रियों को पहुंचा देती है। जबकि लखनऊ जंक्शन से नई दिल्ली के बीच चलने वाली तेजस एक्सप्रेस दिल्ली पहुंचने में सवा छह घंटे ही लेती है। तुलनात्मक रूप से देखें तो समय में ज्यादा अंतर नहीं है। पर, रेलवे अधिकारियों की लापरवाही के चलते मंडल की शान रही शताब्दी एक्सप्रेस बदहाल होती जा रही है।

लखनऊ जंक्शन से नई दिल्ली के बीच चलने वाली शताब्दी एक्सप्रेस का इतिहास गौरवमयी रहा है। इसने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। दूसरी सबसे तेज दौड़ने वाली ये शताब्दी आईएसओ प्रमाणित भी है।

देश में पहली बार एलएचबी बोगियों का ट्रायल भी शताब्दी एक्सप्रेस में ही हुआ है। पर, तेजस एक्सप्रेस को सफल बनाने के लिए अब शताब्दी पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसके चलते ही यात्री शताब्दी से मुंह मोड़ने लगे हैं।

नवंबर 1988 में तत्कालीन रेलमंत्री माधवराव सिंधिया के कार्यकाल में शताब्दी एक्सप्रेस चलाने का खाका तैयार किया गया। योजना थी कि मेट्रो सिटी को शताब्दी से जोड़ा जाए। खाका जमीन पर उतारा गया।

देशभर में 24 जोड़ी से अधिक शताब्दी अब तक पटरी पर उतर चुकी हैं। इसमें लखनऊ जंक्शन से नई दिल्ली के बीच चलने वाली स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस (02003/04) पहले कानपुर व नई दिल्ली के बीच चलती थी।

पर, जब 1993 में आमान परिवर्तन (गेज कन्वर्जन) हुआ तो ट्रेन का दायरा बढ़ाकर यूपी की राजधानी लखनऊ तक कर दिया गया।

रेलवे विशेषज्ञ एसके शर्मा ने बताया कि साल 2001 के आसपास यह ट्रेन लखनऊ मंडल को मिली। पहले इसका संचालन उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के पास था, लेकिन इसे नई दिल्ली से चारबाग लाने और फिर उसे वापस रवाना करने में दिक्कतें होती थीं।

शताब्दी एक्सप्रेस लखनऊ मंडल की शान रही है। इस ट्रेन की एक-एक सीट के लिए मारामारी होती थी। चूंकि, पूरी ट्रेन चेयरकार है, इसलिए यात्री दिन के दिन दिल्ली पहुंच जाते हैं, लेकिन स्थिति अब यह हो गई है कि शताब्दी में सुविधाएं घटा दी गई हैं और किराया महंगा कर दिया गया है।

इसलिए यात्री कतरा रहे हैं। पहले ट्रेन के किराए में खानपान शामिल था, अब अलग से पैसा देना पड़ता है। यही नहीं, डायनेमिक फेयर की वजह से किराया भी काफी बढ़ जाता है, जो यात्रियों को रास नहीं आता।

…और जंक्शन पर शिफ्ट हो गई शताब्दी

शताब्दी एक्सप्रेस पहले चारबाग रेलवे स्टेशन से नई दिल्ली के बीच चलती थी। लेकिन बाद में इसे एक योजना के अंतर्गत लखनऊ जंक्शन पर शिफ्ट कर दिया गया। लखनऊ से चलने व टर्मिनेट होने वाली गाड़ियों को जंक्शन पर शिफ्ट करने का खाका बनाया गया, जिसके बाद से यह जंक्शन से चल रही है। पहले इसमें परंपरागत कोच लगते थे।

दूसरी सबसे तेज शताब्दी

लखनऊ जंक्शन नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस देशभर में दौड़ रही शताब्दी में रफ्तार के मामले में दूसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस है। जो 155 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती है। जबकि अपनी शताब्दी एक्सप्रेस 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है। यही वजह है कि लखनऊ से दिल्ली महज 6.45 घंटे में यात्रियों को पहुंचा देती है। जबकि लखनऊ जंक्शन से नई दिल्ली के बीच चलने वाली तेजस एक्सप्रेस दिल्ली पहुंचने में सवा छह घंटे ही लेती है। तुलनात्मक रूप से देखें तो समय में ज्यादा अंतर नहीं है। पर, रेलवे अधिकारियों की लापरवाही के चलते मंडल की शान रही शताब्दी एक्सप्रेस बदहाल होती जा रही है।



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