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Shradh paksha 2021, pitru paksha 2021, sarvpitrumoksha amawasya on 6 october, unknown facts about pitru paksha | अविवाहित व्यक्ति की मृत्यु तिथि मालूम न हो तो 25 सितंबर को करें श्राद्ध, असमय मृत लोगों का श्राद्ध 5 अक्टूबर को करें


10 घंटे पहले

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अभी पितृ पक्ष चल रहा है। इन दिनों में परिवार के मृत लोगों का श्राद्ध कर्म मृत्यु तिथि के आधार पर किया जाता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक श्राद्ध कर्म व्यक्ति की मृत्यु तिथि पर ही करना चाहिए। अगर किसी मृत व्यक्ति की मृत्यु तिथि की जानकारी न हो तो हमें उनका श्राद्ध कब करना चाहिए, इस संबंध में कुछ खास तिथियां बताई गई हैं। जानिए ये तिथियां कौन-कौन सी हैं…

अगर किसी अविवाहित व्यक्ति की मृत्यु तिथि मालूम न हो तो उसका श्राद्ध पितृ पक्ष की पंचमी तिथि पर करना चाहिए। इस बार ये तिथि 25 सितंबर को है।

सुहागिन महिला की मृत्यु तिथि मालूम न हो तो उसका श्राद्ध पितृ पक्ष की नवमी तिथि (30 सितंबर) पर करना चाहिए। इसी तिथि पर परिवार की अन्य मृत महिलाओं की आत्म शांति के लिए भी श्राद्ध कर्म किया जा सकता है।

जो लोग संन्यासी हो गए थे और उनकी मृत्यु हो गई, अगर उनकी मृत्यु तिथि की जानकारी नहीं है तो उनका श्राद्ध पितृ पक्ष की एकादशी (2 अक्टूबर) पर करना चाहिए।

मृत बच्चों की मृत्यु तिथि मालूम न हो तो उनका श्राद्ध पितृ पक्ष की त्रयोदशी (4 अक्टूबर) तिथि पर किया जाता है।

किसी व्यक्ति की मृत्यु असमय हो गई है तो उसे अकाल मृत्यु कहा जाता है। अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु शस्त्र से हुई हो या किसी ने आत्म हत्या की हो या जहर खाने की वजह से हुई हो या किसी दुर्घटना में हुई हो और उनकी मृत्यु तिथि मालूम न हो तो उनका श्राद्ध कर्म पितृ पक्ष की चतुर्दशी (5 अक्टूबर) तिथि पर करना चाहिए।

पितृ पक्ष की अंतिम तिथि को सर्वपितृमोक्ष अमावस्या कहा जाता है। इस बार ये तिथि 6 अक्टूबर को है। इस तिथि पर उन सभी मृत लोगों का श्राद्ध कर्म किया जा सकता है, जिनका पितृ पक्ष में श्राद्ध करना हम भूल गए हैं या जिनकी मृत्यु तिथि मालूम नहीं है।

ऐसे कर सकते हैं श्राद्ध कर्म

स्नान के बाद कुतुप काल यानी दोपहर में करीब 12 बजे श्राद्ध कर्म करना चाहिए। श्राद्ध दक्षिण दिशा में मुंह रखकर करना चाहिए। जलते हुए कंडों के अंगारों पर गुड़-घी, खीर और भोजन अर्पित करें। हाथ में जल लें और उसमें जौ, काले तिल, चावल, गाय का दूध, सफेद फूल और जल लेकर अंगूठे की ओर से पितरों का ध्यान करते हुए अर्पित करें। जल तांबे के बर्तन में अर्पित करना चाहिए। इसके बाद गाय, कुत्ते, कौए और चींटियों के लिए घर के बाहर भोजन रखें। जरूरतमंद लोगों को खाने का और धन का दान करें। ये श्राद्ध कर्म करने की सरल विधि है।

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