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Sita Navami today gave sage-sages advice to Raja Janak to plow the field, then she got mother Janaki in the urn | ऋषि-मुनियों ने दी थी राजा जनक को खेत में हल चलाने की सलाह, तब उन्हें कलश में मिली माता जानकी


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4 घंटे पहले

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  • जानकी नवमी पर सुहाग की चीजों का दान करने से बढ़ता है सौभाग्य, इस दिन व्रत करने से दुख दूर होते हैं

आज जानकी जयंती है। वैशाख महीने के शुक्लपक्ष की नवमी तिथि को सीताजी का प्राकट्य हुआ था। इसलिए इस दिन को जानकी नवमी या सीता नवमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन माता सीता और श्रीराम की पूजा की जाती है और व्रत भी रखा जाता है। ऐसा करने से हर तरह की परेशानियां दूर होती हैं और पति की उम्र बढ़ती है। जानकी जयंती पर सुहाग की चीजों का दान करने की भी परंपरा है। इससे सौभाग्य बढ़ता है। माना जाता है कि माता सीता की पूजा और व्रत करने वाली महिलाओं में धैर्य, त्याग, शील, ममता और समर्पण जैसे गुण आते हैं और आत्मविश्वास भी बढ़ता है।

ऋषि-मुनियों ने दी राजा जनक को खेत में हल चलाने की सलाह रामायण के मुताबिक, मिथिला राज्य में कई सालों से बारिश नहीं हुई। इससे वहां के राजा जनक ने ऋषि-मुनियों से विचार-विमर्श किया और परेशानी दूर करने का अनुरोध किया। उस समय ऋषि-मुनियों ने राजा जनक को खेत में हल चलाने की सलाह दी और कहा कि अगर ऐसा करेंगे तो तो इंद्र देवता की कृपा जरूर होगी। राजा जनक ने ऋषि-मुनियों के कहे मुताबिक वैशाख महीने के शुक्लपक्ष की नवमी को खेत में हल चलाया। इसी दौरान उनके हल से कलश टकराया। जिसमें एक कन्या थी। राजा जनक ने कलश में मिली कन्या को अपनी पुत्री मानकर उनका पालन-पोषण किया। हल के अगले हिस्से को सीत कहा जाता है। इसलिए राजा जनक ने हल जोतने पर मिली उस कन्या का नाम सीता रखा। राजा की कोई संतान नहीं थी। इसलिए वो खुश हुए। सीता को जानकी और मिथिलेश कुमारी जैसे नामों से भी जाना जाता है।

इस दिन दान करने से मिलता है पुण्य पुरी के ज्योतिषाचार्य और धर्म ग्रंथों के जानकार डॉ. गणेश मिश्र बताते हैं कि सीता नवमी के दिन व्रत और पूजा के साथ दान का भी बहुत महत्व होता है। इस दिन दिया गया दान कन्या दान और चारधाम तीर्थ के बराबर माना जाता है। जानकी नवमी के दिन सुहाग की चीजों का दान करने से सौभाग्य और सुख बढ़ता है। साथ ही हर तरह की परेशानियां दूर होने लगती हैं। इस दिन छोटे-छोटे दान का फल कन्या दान के बराबर होता है।

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