मुंबई में बेटे की मौत, अंतिम दर्शन तक नहीं कर पाए परिवारवाले, पुतला बनाकर किया अंतिम संस्‍कार

गोरखपुर के एक युवक की मुम्बई में गुरुवार की रात में मौत हो गई। वह चूड़ी बनाने वाली एक फैक्ट्री में काम करता था। युवक की मौत की खबर मिलते ही गांव में मातम पसर गया। गरीबी और लॉकडाउन के चलते शव गांव ले आने में असमर्थता जताते हुए पिता ने शुक्रवार की शाम को बेटे का आटे का पुतला बनाकर आमी नदी के किनारे अंतिम संस्कार कर दिया।

रामनगर सूरस निवासी सरजू का 27 साल का पुत्र उमेश नौ महीने पहले अपने एक रिश्तेदार के साथ मुम्बई में कमाने गया था। वह भयंदर में चूड़ी बनाने वाली एक फैक्ट्री में मजदूरी करता था। ग्राम प्रधान राजकुमार ने बताया कि 30 अप्रैल को उसकी तबीयत अचानक खराब हो गई तो साथ रहने वाले युवकों ने उसे भयंदर हायर सेकंडरी स्कूल के पास स्थित एक मंदिर के पास छोड़ दिया था। मंदिर के पुजारी ने बीमार युवक को एंबुलेंस से शताब्दी अस्पताल में भर्ती कराया था। देर शाम को उमेश ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। ग्राम प्रधान ने देर शाम हाल-चाल जानने के लिए फोन किया तो मौत की जानकारी हुई।

उन्होंने भयंदर पुलिस से सम्पर्क किया तो पुलिस ने मौत की पुष्टि करते हुए शव ले जाने के लिए कहा। इधर, बेटे की मौत की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। सरजू ने प्रधान के जरिये मुम्बई पुलिस से बात करते हुए शव ले आने में असमर्थता जताई। उन्होंने वहीं पर बेटे के शव का अन्तिम संस्कार कर दिया। प्रधान राजकुमार ने बताया कि मुम्बई पुलिस ने कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद अन्तिम संस्कार का भरोसा दिया तथा उसकी वीडियो भी भेजने की बात कही।

इधर, पिता सरजू ने शुक्रवार की शाम को आमी नदी के किनारे बेटे उमेश का आटे का पुतला बनाकर अंतिम संस्कार की रस्म अदा कर दी। गौरतलब है कि बीते दिनों चौरीचौरा के डुमरी खुर्द निवासी अनिल की दिल्ली में बीमारी से मौत हो गई थी। उसकी पत्नी ने भी पुतला बनाकर अंतिम संस्कार कर दिया था। यह खबर सामने आते ही मुख्यमंत्री हरकत में आ गए और उन्होंने अनिल के परिवार तक मदद पहुंचाई थी।

पिता और भाई भी करते हैं मजदूरी 
उमेश एक भाई और दो बहनों में सबसे बड़ा था, दोनों बहनों की अभी शादी नहीं हुई है। पिता सरजू और छोटा भाई सोनू मजदूरी करके परिवार का गुजारा करते हैं। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। पिता ने कहा कि बेटे का शव ले आने में न सिर्फ काफी पैसा लगेगा बल्कि दिक्कत भी होगी इसलिए उन्होंने प्रधान के जरिये मुम्बई पुलिस से ही अन्तिम संस्कार करने का आग्रह किया है। वहीं शुक्रवार की शाम को आटे का पुतला बनाकर आमी नदी के किनारे अन्तिम संस्कार करने के बाद मैं अपनी कार्रवाई यहां कर रहा हूं।

डिलेवरी के दौरान हो गई थी उमेश के पत्नी की मौत  
उमेश की शादी संतकबीर नगर के सेमरा डाढ़ी गांव निवासी कुमकुम से वर्ष 2018 में हुई थी। डिलेवरी के दौरान जून 2019 में कुमकुम की उसके मायके में मौत हो गई थी। पत्नी की मौत के महीने भर बाद 28 जुलाई 2019 को उमेश मुम्बई कमाने गया था। पहले बहू और अब बेटे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

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