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Sultanpur: One Hanged And Another Sentenced To Life Imprisonment In Mass Murder – सुल्तानपुर में सामूहिक कांड के हत्यारे को फांसी की सजा, सह अभियुक्त को आजीवन कारावास


फांसी का फंदा
– फोटो : फांसी का फंदा

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सुल्तानपुर में कोइरीपुर नगर पंचायत में वर्ष 2015 में चार लोगों के हुए सामूहिक हत्याकांड में मंगलवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय की न्यायाधीश पूनम सिंह ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। उन्होंने मामले को विरलतम श्रेणी का मानते हुए मुख्य अभियुक्त को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने सह अभियुक्त को उम्रकैद की सजा सुनाकर जेल भेज दिया। न्यायाधीश ने एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।

चांदा थाने के कोइरीपुर नगर पंचायत के शास्त्रीनगर में सात अक्तूबर 2015 को आरोपियों मो. उमर व लईक अहमद ने धारदार हथियार से मारकर जावेद, मोइनुद्दीन, जौहर व गौहर की हत्या कर दी थी। पुलिस ने मामले में सरफुद्दीन की तहरीर पर आरोपी मो. उमर व लईक अहमद के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। मामले की विवेचना पूरी कर 23 जनवरी 2016 को पुलिस ने आरोपी मो. उमर व लईक अहमद के साथ ही लल्लू के खिलाफ भी हत्या व जानलेवा हमले के अभियोग में चार्जशीट दाखिल की थी।

मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे एडीजीसी क्रिमिनल मनोज कुमार दुबे ने घटना को साबित करने के लिए 10 गवाहों को कोर्ट में पेश किया। मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय की न्यायाधीश पूनम सिंह ने पिछले शनिवार को साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अभियुक्तों मो. उमर व लईक अहमद को हत्या व जानलेवा हमला करने का दोषी करार देते हुए फैसले को सुरक्षित कर लिया था। कोर्ट ने सह अभियुक्त लल्लू को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। मंगलवार को न्यायाधीश ने इस मामले को विरलतम श्रेणी का मानते हुए मुख्य अभियुक्त लईक अहमद को फांसी व सह अभियुक्त मो. उमर को उम्रकैद की सजा सुनाकर जेल भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने अभियुक्तों पर 17-17 हजार रुपये जुर्माना भी किया है।

सुल्तानपुर में कोइरीपुर नगर पंचायत में वर्ष 2015 में चार लोगों के हुए सामूहिक हत्याकांड में मंगलवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय की न्यायाधीश पूनम सिंह ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। उन्होंने मामले को विरलतम श्रेणी का मानते हुए मुख्य अभियुक्त को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने सह अभियुक्त को उम्रकैद की सजा सुनाकर जेल भेज दिया। न्यायाधीश ने एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।

चांदा थाने के कोइरीपुर नगर पंचायत के शास्त्रीनगर में सात अक्तूबर 2015 को आरोपियों मो. उमर व लईक अहमद ने धारदार हथियार से मारकर जावेद, मोइनुद्दीन, जौहर व गौहर की हत्या कर दी थी। पुलिस ने मामले में सरफुद्दीन की तहरीर पर आरोपी मो. उमर व लईक अहमद के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। मामले की विवेचना पूरी कर 23 जनवरी 2016 को पुलिस ने आरोपी मो. उमर व लईक अहमद के साथ ही लल्लू के खिलाफ भी हत्या व जानलेवा हमले के अभियोग में चार्जशीट दाखिल की थी।

मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे एडीजीसी क्रिमिनल मनोज कुमार दुबे ने घटना को साबित करने के लिए 10 गवाहों को कोर्ट में पेश किया। मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय की न्यायाधीश पूनम सिंह ने पिछले शनिवार को साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अभियुक्तों मो. उमर व लईक अहमद को हत्या व जानलेवा हमला करने का दोषी करार देते हुए फैसले को सुरक्षित कर लिया था। कोर्ट ने सह अभियुक्त लल्लू को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। मंगलवार को न्यायाधीश ने इस मामले को विरलतम श्रेणी का मानते हुए मुख्य अभियुक्त लईक अहमद को फांसी व सह अभियुक्त मो. उमर को उम्रकैद की सजा सुनाकर जेल भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने अभियुक्तों पर 17-17 हजार रुपये जुर्माना भी किया है।



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