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Sun’s zodiac change Tomorrow is the father of astrology, the sun god, 7 horses in his chariot symbolizes seven days | ज्योतिष के जनक है सूर्य देवता, इनके रथ में 7 घोड़े सात दिनों के प्रतीक हैं


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  • Sun’s Zodiac Change Tomorrow Is The Father Of Astrology, The Sun God, 7 Horses In His Chariot Symbolizes Seven Days

13 घंटे पहले

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  • ऋग्वेद में बताया गया है कि सूर्य की पूजा करने से मिलती है पापों से मुक्ति, इससे उम्र और सुख भी बढ़ता है

15 जून को सूर्य संक्रांति पर्व मनाया जाएगा। इस दिन स्नान-दान के साथ ही सूर्य पूजा की परंपरा है। वेदों में सूर्य को प्रत्यक्ष देवता बताया गया है। साथ ही ये पंचदेवों में एक हैं। इसलिए इनकी पूजा को जरूरी माना गया है। सूर्य देवता की पूजा से हर तरह के दोष और पाप खत्म हो जाते हैं। साथ ही इन्हें मनोकामना पूरी करने वाला भी कहा गया है। इसलिए हर महीने जब सूर्य राशि बदलता है तब उस दिन संक्रांति पर्व मनाते हुए भगवान सूर्य की विशेष पूजा की जाती है।

ज्योतिष के जनक सूर्य
सूर्यदेव की पूजा 12 महीनों में अलग-अलग नामों से की जाती है। सूर्य देवता को ही ज्योतिष का जनक माना गया है। ये सभी ग्रहों के राजा हैं। इस ग्रह की स्थिति से ही कालगणना की जाती है। दिन-रात से लेकर महीने, ऋतुएं और सालों की गणना सूर्य के बिना नहीं की जा सकती।

ये हर महीने में राशि बदलते हैं। सूर्य के राशि परिवर्तन से ही मौसम बदलते हैं। पक्षीराज गरुड़ के भाई अरुण सूर्यदेव का रथ चलाते हैं। इस रथ में 7 घोड़े हैं जो 7 दिनों के प्रतीक हैं। गायत्री मंत्र में भी सूर्य की उपासना ही की गई है।

वेदों और उपनिषद में सूर्य
ऋग्वेद में बताया गया है कि सूर्य पूजा से पापों से मुक्ति मिलती है। बीमारियां खत्म होती हैं। सूर्य पूजा से उम्र और सुख बढ़ता है। साथ ही दरिद्रता भी दूर होती है। यजुर्वेद में कहा है कि सूर्यदेव इंसान के हर कामों के साक्षी हैं। इनसे कोई भी काम या व्यवहार नहीं छुपा होता है। इसलिए इनकी आराधना करनी चाहिए। सूर्योपनिषद के मुताबिक, सभी देवता, गंधर्व और ऋषि सूर्य की किरणों में निवास करते हैं। सूर्य भगवान की उपासना के बिना किसी का भी कल्याण नहीं होता।

पुराणों में सूर्य पूजा
ब्रह्मपुराण में कहा गया है कि सूर्यदेव सर्वश्रेष्ठ देवता हैं। इनकी उपासना करने वाले भक्त जो सामग्री इन्हें चढ़ाते हैं, सूर्यदेव उसे लाख गुना करके लौटाते हैं। स्कंदपुराण के मुताबिक, सूर्यदेव को जल चढ़ाए बिना भोजन करना पाप माना जाता है। सूर्य पुराण में कहा गया है कि संक्रांति पर्व पर सूर्य को अर्घ्य देने और दान करने से हर तरह की शारीरिक परेशानियां दूर हो जाती हैं और उम्र बढ़ती है।

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