प्रवासी मजदूरों के मामले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और राज्य सरकारों से मांगा जवाब

Supreme Court

नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण देश में सबसे ज्यादा परेशानी प्रवासी मजदूरों (Migrant Workers) को उठानी पड़ी है. कोरोना लॉकडाउन (Lockdown) ने उन्हें सड़कों पर ला दिया है. रोजगार छिन जाने के कारण हजारों की संख्या में श्रमिक पैदल ही घर जाने को मजबूर हैं. जिसके कारण कई मजदूरों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों से जुड़ी याचिका संज्ञान में लेते हुए केंद्र सहित सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है.

28 मई तक देना होगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट के 20 सीनियर एडवोकेट ने सोमवार को प्रवासी मजदूरों की बदहाली को लेकर सुप्रीम कोर्ट को एक खत लिखा था. जिसके अगले ही दिन सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों के हालातों वाली याचिका संज्ञान में ली. कोर्ट ने केंद्र और सभी सरकारों को नोटिस जारी कर गुरूवार तक जवाब देने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट मामले की सुनवाई 28 मई को करेगा. केंद्र और राज्य सरकारों को कोर्ट में यह बताना है कि आखिर उन्होंने प्रवासी मजदूरों की स्थिति सुधारने के लिए अभी तक कौन से जरूरी कदम उठाए हैं.

कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला भी पहुंचे कोर्ट

प्रवासी मजदूरों की बदहाली पर सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान लिए जाने के बाद कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला भी कोर्ट पहुंचे. उन्होंने कोर्ट से इस मामले पर दलीलें रखने की इजाजत मांगी. गुरुवार को उनकी याचिका भी इस मामले के साथ सुनवाई के लिए लगेगी.

पहले भी उठ चुका है मुद्दा

इसके पहले घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों के हादसे में मौत का मामला भी सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने 15 मई को सुनवाई में कहा था कि प्रवासी मजदूरों की आवाजाही की निगरानी करना कोर्ट के लिए मुमकिन नहीं है. लोग सड़कों पर चल रहे हैं तो उन्हें कैसे रोका जा सकता है. देश में प्रवासी श्रमिकों के मामले में सरकार को ही जरूरी कार्रवाई करनी होगी.

आपको बता दें कि केंद्र और सभी राज्य सरकारें लॉकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके गृह जनपद तक पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं. इस बाबत भारतीय रेलवे ने कई स्पेशल श्रमिक ट्रेनों की भी शुरूआत की है. जिससे प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह राज्य तक पहुंचाया जा रहा है.

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