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Surya Sankranti 2021; Sun Will Enter Kumbh Rashi, How To Worship? Surya Arghya Significance | शुक्रवार को मकर से निकलकर कुंभ राशि में आएगा सूर्य, संक्रांति पर्व मनाया जाएगा इस दिन


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10 घंटे पहले

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  • कुंभ संक्रांति से प्रकृति में आने लगते हैं बदलाव, इसी समय पतझड़ और गर्मी की शुरुआत होती है

12 फरवरी, शुक्रवार को कुंभ संक्रांति पर्व मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य मकर से निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएगा। ज्योतिष और धर्म ग्रंथों में बताया गया है कि जिस दिन सूर्य एक राशि से दूसरी में जाता है। उस दिन को संक्रांति पर्व कहा जाता है। ये साल में 12 बार मनाया जाता है। संक्रांति पर्व पर सूर्योदय से पहले उठकर तीर्थ-स्नान और फिर उगते हुए सूरज को अर्घ्य देने की परंपरा है। इस दिन श्रद्धा के मुताबिक, जरूरतमंद लोगों को खाना और ऊनी कपड़ों का दान भी दिया जाता है। अर्क पुराण का कहना है कि ऐसा करने से हर तरह की शारीरिक परेशानियां दूर हो जाती हैं।

पंचदेवों में सूर्य
पुराणों में भगवान सूर्य, शिव, विष्णु, गणेश और देवी दुर्गा को पंचदेव कहा गया है। ब्रह्मवैवर्त और स्कंद पुराण में बताया गया है कि इन देवी-देवताओं की पूजा करने हर तरह के दोष और पाप खत्म हो जाते हैं। इन 5 को नित्य देवता और मनोकामना पूरी करने वाला भी कहा गया है। इसलिए हर महीने में जब सूर्य राशि बदलता है तब उस दिन संक्रांति पर्व मनाते हुए भगवान सूर्य की विशेष पूजा की जाती है।

ज्योतिष में सूर्य
सूर्य देवता को ही ज्योतिष का जनक माना गया है। सूर्य ही सभी ग्रहों का राजा है। इस ग्रह की स्थिति से ही कालगणना की जाती है। दिन-रात से लेकर महीने, ऋतुएं और सालों की गणना सूर्य के बिना नहीं की जा सकती। हर महीने जब सूर्य राशि बदलता है तो मौसम में बदलाव होने लगते हैं। जिससे ऋतुएं भी बदलती हैं। इसी वजह से सूर्य की स्थिति महत्वपूर्ण मानी जाती है।

एक साल में 12 संक्रांति पर्व
एक साल में 12 संक्रांति होती हैं। सूर्य सभी 12 राशियों में घूमता है। जब ये ग्रह एक से दूसरी राशि में जाता है तो इसे संक्रांति कहते हैं। जिस राशि में सूर्य आता है उसी के नाम से संक्रांति होती है। जैसे मकर राशि में जाने पर मकर संक्रांति और तकरीबन उसके एक महीने जब कुंभ में प्रवेश करेगा तो कुंभ संक्रांति मनाई जाती है। 12 फरवरी को सूर्य का राशि परिवर्तन होने से इस दिन भगवान सूर्य की विशेष पूजा करनी चाहिए साथ ही इस दिन स्नान-दान जैसे शुभ काम करने की भी परंपरा ग्रंथों में बताई गई है।

संक्रांति पर्व पर क्या करें
इस पर्व पर सूर्योदय से पहले उठकर तीर्थ स्नान करना चाहिए। पं. मिश्र के मुताबिक ऐसा न कर पाए तो घर पर ही पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे मिलाकर नहा लेना चाहिए। इससे तीर्थ स्नान का पुण्य मिलता है। इसके बाद उगते हुए सूरज को प्रणाम करें। फिर अर्घ्य दें। उसके बाद धूप-दीप दिखाएं और आरती करें। आखिरी में फिर से सूर्य देवता को प्रणाम करें और 7 बाद प्रदक्षिणा करें। यानी एक ही जगह पर खड़े होकर 7 बार परिक्रमा करते हुए घूम जाएं। पूजा के बाद वहीं खड़े होकर श्रद्धा के मुताबिक, दान करने का संकल्प लें और दिन में जरूरतमंद लोगों को खाना और ऊनी कपड़ों का दान करें। हो सके तो इस दिन व्रत भी कर सकते हैं। पूरे दिन नमक खाए बिना व्रत रखने से हर तरह की परेशानियां दूर होती हैं और मनोकामना पूरी होती है।

ध्यान रखने वाली बातें
सूर्य पूजा के लिए तांबे की थाली और तांबे के लोटे का इस्तेमाल करें। थाली में लाल चंदन, लाल फूल और घी का दीपक रखें। दीपक तांबे या मिट्‌टी का हो सकता है। अर्घ्य देते वक्त लोटे के पानी में लाल चंदन मिलाएं और लाल फूल भी डालें।
ऊँ घृणि सूर्यआदित्याय नमः मंत्र बोलते हुए अर्घ्य दें और प्रणाम करें। अर्घ्य वाले पानी को जमीन पर न गिरने दें। किसी तांबे के बर्तन में ही अर्घ्य गिराएं। फिर उस पानी को किसी ऐसे पेड़-पौधे में डाल दें। जहां किसी का पैर न लगे।



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