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The ancestors are also satisfied by offering water to Peepal on this day on Amavasya 6, as well as easy method, Shradh can be done at home. | इस दिन पीपल में जल चढ़ाने से भी तृप्त होते हैं पितर साथ ही आसान विधि से घर पर ही किया जा सकता है श्राद्ध


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  • The Ancestors Are Also Satisfied By Offering Water To Peepal On This Day On Amavasya 6, As Well As Easy Method, Shradh Can Be Done At Home.

2 घंटे पहले

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  • सर्वपितृमोक्ष अमावस्या पर 3 शुभ योग, इस संयोग में किए गए तर्पण से कई सालों तक तृप्त रहेंगे पितर

6 अक्टूबर, गुरुवार को अश्विन महीने की अमावस्या है। इसे सर्वपितृ अमावस्या भी कहते हैं। इस दिन 11 साल बाद गजछाया योग बन रहा है। इस दिन सर्वार्थसिद्धि और चतुर्ग्रही योग भी रहेगा, जिससे पर्व का महत्व कई गुना बढ़ गया है। इस शुभ संयोग में तीर्थ स्नान, पीपल पूजा, दीपदान और श्राद्ध करने से पितर तृप्त हो जाते हैं।

तीर्थ स्नान और दीपदान से पितृ शांति
जिन लोगों की अकाल मृत्यु हुई या जिनकी तिथि याद नहीं हैं। उनके श्राद्ध और तर्पण के लिए सर्वपितृमोक्ष अमावस्या का दिन श्रेष्ठ रहेगा। श्राद्ध पक्ष के आखिरी दिन तीर्थ स्नान करने की भी परंपरा है। साथ ही इस दिन सभी ज्ञात-अज्ञात पितृजन, पुरुखों के सामूहिक श्राद्धकर्म के बाद शाम को दीपदान का भी विशेष महत्व है।

पितृ शांति के लिए पीपल में दूध चढ़ाएं
सर्वपितृ अमावस्या पर पंचबलि कर्म (ब्रह्मण, गाय, कुत्ते, कौवे और चीटीं का भोजन) के साथ ही पीपल की सेवा और पूजा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। लोटे में दूध, पानी, काले तिल और जौ मिलाकर पीपल की जड़ में चढ़ाना चाहिए। शास्त्रों का कहना है कि जो नरक से रक्षा करता है, वही पुत्र है। इस दिन किया श्राद्ध पुत्र को पितृदोषों से मुक्ति दिलाता है।

आसान विधि से श्राद्ध
श्राद्ध वाली तिथि पर सूर्योदय से पहले उठकर नहाएं।
साफ कपड़े पहनकर पितरों की तृप्ति के लिए श्राद्ध और दान का संकल्प लें। श्राद्ध होने तक कुछ न खाएं।
दिन के आठवें मुहूर्त यानी कुतुप काल में श्राद्ध करें। जो कि 11.36 से 12.24 तक होता है।
दक्षिण दिशा में मुंह रखकर बाएं पैर को मोड़कर, घुटने को जमीन पर टीका कर बैठ जाएं।
तांबे के चौड़े बर्तन में जौ, तिल, चावल गाय का कच्चा दूध, गंगाजल, सफेद फूल और पानी डालें।
हाथ में कुशा घास रखें और उस जल को हाथों में भरकर सीधे हाथ के अंगूठे से उसी बर्तन में गिराएं। इस तरह 11 बार करते हुए पितरों का ध्यान करें।
पितरों के लिए अग्नि में खीर अर्पण करें। इसके बाद पंचबलि यानी देवता, गाय, कुत्ते, कौए और चींटी के लिए अलग से भोजन निकाल लें।
ब्राह्मण भोजन करवाएं और श्रद्धा के अनुसार दक्षिणा और अन्य चीजों का दान करें।

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