Most Popular

Social Media

Get The Latest Updates

Subscribe To Our Weekly Newsletter

No spam, notifications only about new products, updates.

The Government Summoned 18 Dfos – शासन ने किया 18 डीएफओ से जवाब-तलब


ख़बर सुनें

पौधरोपण के लिए स्कूटर से गड्ढा खोदने के कारनामे पर प्रदेश सरकार सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में है। प्रधान महालेखाकार के ऑडिट में मामला पकड़ में आने के बाद शासन ने 18 वन प्रभागाधिकारियों (डीएफओ) से जवाब-तलब किया है। माना जा रहा है कि इनमें से कुछ पर जल्द गाज गिर सकती है।

वर्ष 2017, 2018 और 2019 में मार्च माह के मासिक वाउचरों के ऑडिट में 1.07 करोड़ रुपये का यह घपला सामने आया था। वन विभाग ने पौधरोपण के लिए गड्ढे खोदने व अन्य संबंधित कामों में जिन जेसीबी और ट्रैक्टर का इस्तेमाल दिखाया, उनके नंबर मोपेड, मोटर साइकिल और स्कूटर के निकले।

प्रधान महालेखाकार (पीएजी) की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पौधरोपण और पौधों की सुरक्षा के लिए गड्ढे व खाई खोदने, मिट्टी का कार्य, पौधों व गोबर का परिवहन, ईंट ढुलाई और पौधों को पानी देने का काम किया गया। बिल वाउचर में बताया गया कि इसके लिए ट्रैक्टर और जेसीबी लगाई गई।

ऑडिट में परिवहन विभाग के रिकॉर्ड से जांच में कथित ट्रैक्टर व जेसीबी के नंबर मोटरसाइकिल, जीप, स्कूटर व मोपेड के निकले। इस तरह के कुल 662 फर्जी वाउचर पकड़ में आए जिस पर शासन ने लिफाफाबंद नोटिस वन मुख्यालय के माध्यम से डीएफओ को भिजवाए हैं। इसकी पुष्टि वन विभागाध्यक्ष सुनील कुमार पांडेय ने की है।

यहां हुआ फर्जीवाड़ा 
इटावा, लखनऊ, प्रयागराज, डीएनपी पलिया, ललितपुर, हमीरपुर, गोरखपुर, संतकबीरनगर, कतर्नियाघाट, कानपुर देहात, झांसी, प्रतापगढ़, गोंडा, लखीमपुर नॉर्थ खीरी, बस्ती और आजमगढ़ वन प्रभागों में

तर्क से शासन सहमत नहीं 
अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया। इसके बाद सभी संबंधित वन प्रभागों ने यह स्वीकार किया कि बताए गए नंबर ट्रैक्टर और जेसीबी के नहीं हैं। हालांकि, संबंधित अधिकारियों का कहना है कि लिपिकीय त्रुटि के कारण ऐसा हुआ। सूत्रों के मुताबिक, इस तर्क से शासन सहमत नहीं हुआ। 

इनके नाम शामिल
झांसी के तत्कालीन डीएफओ मनोज शुक्ला, ललितपुर के तत्कालीन डीएफओ बीके जैन (अब सेवानिवृत्त), हमीरपुर के तत्कालीन डीएफओ सोमधर पांडे (अब सेवानिवृत्त), लखनऊ के तत्कालीन डीएफओ मनोज सोनकर, डीएनपी पलिया के तत्कालीन डीएफओ महावीर कौजलागी, कतर्नियाघाट के तत्कालीन डीएफओ जीपी सिंह, लखीमपुर नॉर्थ खीरी के तत्कालीन डीएफओ डॉ. अनिल पटेल आदि।  

पौधरोपण के लिए स्कूटर से गड्ढा खोदने के कारनामे पर प्रदेश सरकार सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में है। प्रधान महालेखाकार के ऑडिट में मामला पकड़ में आने के बाद शासन ने 18 वन प्रभागाधिकारियों (डीएफओ) से जवाब-तलब किया है। माना जा रहा है कि इनमें से कुछ पर जल्द गाज गिर सकती है।

वर्ष 2017, 2018 और 2019 में मार्च माह के मासिक वाउचरों के ऑडिट में 1.07 करोड़ रुपये का यह घपला सामने आया था। वन विभाग ने पौधरोपण के लिए गड्ढे खोदने व अन्य संबंधित कामों में जिन जेसीबी और ट्रैक्टर का इस्तेमाल दिखाया, उनके नंबर मोपेड, मोटर साइकिल और स्कूटर के निकले।

प्रधान महालेखाकार (पीएजी) की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पौधरोपण और पौधों की सुरक्षा के लिए गड्ढे व खाई खोदने, मिट्टी का कार्य, पौधों व गोबर का परिवहन, ईंट ढुलाई और पौधों को पानी देने का काम किया गया। बिल वाउचर में बताया गया कि इसके लिए ट्रैक्टर और जेसीबी लगाई गई।

ऑडिट में परिवहन विभाग के रिकॉर्ड से जांच में कथित ट्रैक्टर व जेसीबी के नंबर मोटरसाइकिल, जीप, स्कूटर व मोपेड के निकले। इस तरह के कुल 662 फर्जी वाउचर पकड़ में आए जिस पर शासन ने लिफाफाबंद नोटिस वन मुख्यालय के माध्यम से डीएफओ को भिजवाए हैं। इसकी पुष्टि वन विभागाध्यक्ष सुनील कुमार पांडेय ने की है।

यहां हुआ फर्जीवाड़ा 

इटावा, लखनऊ, प्रयागराज, डीएनपी पलिया, ललितपुर, हमीरपुर, गोरखपुर, संतकबीरनगर, कतर्नियाघाट, कानपुर देहात, झांसी, प्रतापगढ़, गोंडा, लखीमपुर नॉर्थ खीरी, बस्ती और आजमगढ़ वन प्रभागों में

तर्क से शासन सहमत नहीं 

अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया। इसके बाद सभी संबंधित वन प्रभागों ने यह स्वीकार किया कि बताए गए नंबर ट्रैक्टर और जेसीबी के नहीं हैं। हालांकि, संबंधित अधिकारियों का कहना है कि लिपिकीय त्रुटि के कारण ऐसा हुआ। सूत्रों के मुताबिक, इस तर्क से शासन सहमत नहीं हुआ। 

इनके नाम शामिल

झांसी के तत्कालीन डीएफओ मनोज शुक्ला, ललितपुर के तत्कालीन डीएफओ बीके जैन (अब सेवानिवृत्त), हमीरपुर के तत्कालीन डीएफओ सोमधर पांडे (अब सेवानिवृत्त), लखनऊ के तत्कालीन डीएफओ मनोज सोनकर, डीएनपी पलिया के तत्कालीन डीएफओ महावीर कौजलागी, कतर्नियाघाट के तत्कालीन डीएफओ जीपी सिंह, लखीमपुर नॉर्थ खीरी के तत्कालीन डीएफओ डॉ. अनिल पटेल आदि।  



Source link

Share:

Share on facebook
Share on twitter
Share on pinterest
Share on linkedin
Share on whatsapp

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *