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The number of black deer in Talchhapar crossed 3500, in the last wildlife census their number was 148. | तालछापर में काले हिरणों की संख्या 3500 के पार, पिछली वन्य जीव गणना में इनकी संख्या 148 थी


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एक घंटा पहले

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तस्वीर काले हिरणों के लिए मशहूर एशिया के सबसे बड़े तालछापर कृष्णमृग अभयारण्य की है। - Dainik Bhaskar

तस्वीर काले हिरणों के लिए मशहूर एशिया के सबसे बड़े तालछापर कृष्णमृग अभयारण्य की है।

719 हेक्टेयर में फैले अभयारण्य में अभी 3500 से ज्यादा काले हिरण हैं। पिछली वन्य जीव गणना के अनुसार यहां हिरणों की आबादी में 148 की बढ़ोतरी हुई है। खास बात यह है कि मानसून में अच्छी बारिश (करीब 200 मिमी) के कारण यहां ग्रासलैंड विकसित हो गया है, जिससे चारों ओर हरियाली की चादर बिछ गई है। इससे हिरणाें के लिए सालभर की घास का इंतजाम भी हाे गया है।

अधिकारियों के मुताबिक, यहां दो दर्जन से ज्यादा प्रजाति की घासें पनपती हैं। इनमें मोथिया, धामण, कंटील, झेरना, लांपला, डूब, करड़, सेवण, घोड़ा दूब, गठिल घास शामिल हैं। मोथिया घास को काले हिरण व कुरजां पक्षी चाव से खाते हैं। अभयारण्य में 300 से ज्यादा प्रजाति के पक्षी भी रहते हैं, जिनमें मध्य एशिया से आने वाले पक्षी भी शामिल हैं।

अभयारण्य में 5 गुना हिरण

राजस्थान के चूरू स्थित तालछापर अभयारण्य में क्षेत्रफल के अनुपात में 5 गुना हिरण हैं। मानकाें के अनुसार, एक हिरण को घूमने के लिए एक हेक्टेयर की जरूरत हाेती है। हिरणाें काे करीब 30 किमी दूर स्थित नागाैर के जसवंतगढ़ क्षेत्र शिफ्ट करने की याेजना पर वन विभाग काम कर रहा है। जसवंतगढ़ में पूर्व में ग्रासलैंड काे विकसित करने का भी कार्य हुआ था।

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