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The special festival of Sawan is Hariyali Teej on Wednesday, along with the worship of Shiva-Parvati, the tradition of planting trees and plants on this day. | बुधवार को हरियाली तीज, इस दिन शिव-पार्वती की पूजा के साथ पेड़-पौधे लगाने की परंपरा भी


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  • The Special Festival Of Sawan Is Hariyali Teej On Wednesday, Along With The Worship Of Shiva Parvati, The Tradition Of Planting Trees And Plants On This Day.

3 घंटे पहले

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  • पति की लंबी उम्र की कामना से तीज अमावस्या के दिन बिना पानी पीए किया जाता है व्रत

सावन के शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज कहा जाता है। ये पर्व 11 अगस्त, बुधवार को है। ये दिन सुहागनों और कुंवारी लड़कियों के लिए खास होता है। क्योंकि इस दिन शादीशुदा महिलाएं दांपत्य सुख और पति की लंबी उम्र की कामना से बिना पानी पिए व्रत रखती हैं और सौलह श्रंगार कर के भगवान शिव-पार्वती की पूजा करती हैं। वहीं, लड़कियां अच्छे पति की चाह में इस व्रत और पूजा करती हैं।

पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र बताते हैं कि हरियाली तीज पर बुधवार का संयोग होने से इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। बुध ग्रह का रंग हरा होता है और इसका प्रभाव हरियाली, घास और पेड़-पौधों पर ज्यादा होता है। इसलिए इस दिन तुलसी और अन्य पूजनीय पेड़-पौधे लगाने से महादान जितना फल मिलता है। हरियाली तीज पर भगवान शिव को बिल्वपत्र चढ़ाने और बिल्वपत्र के पेड़ की पूजा की भी परंपरा है। ऐसा करने से शिवजी और लक्ष्मी जी की कृपा और बढ़ जाती है।

हरियाली तीज से जुड़ी आस्था
सौंदर्य और प्रेम का ये पर्व भगवान शिव-पार्वती के मिलन के उपलक्ष में मनाया जाता है। चारों तरफ हरियाली होने के कारण इसे हरियाली तीज कहते हैं। इस मौके पर महिलाएं झूला झूलती हैं, गाती हैं और खुशियां मनाती हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा से संकट दूर जाते हैं और सुहागन महिलाओं को पति की लंबी उम्र का आशीर्वाद भी मिलता है।

परंपराएं: क्या करें इस पर्व पर
सावन महीने के शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि यानी तीज पर भगवान शिव-पार्वती की पूजा करनी चाहिए। व्रत या उपवास किया जाता है। जिसमें दिनभर फल खाए जाते हैं। इस दिन दूध और इससे बनी चीजें भी नहीं खाई जाती। इस दिन शादीशुदा महिलाओं को सौलह श्रंगार करने चाहिए। सुहागनों के साथ ही कुंवारी कन्याएं मेहंदी लगाती हैं। इस पर्व पर झूला झूलने की भी परंपरा है। साथ ही इस दिन तुलसी और अन्य औषधीय और पवित्र पेड़-पौधे भी लगाने चाहिए।

मायके से आते हैं फल-मिठाई
इस दिन महिलाएं दिनभर का उपवास रखती हैं और पति सहित समस्त घर के लिए सुख, समृद्धि की कामना करती हैं। महिला ससुराल में है तो मायके से उनके लिए कपड़े, गहने, शृंगार का सामान, मेहंदी, मिठाई और फल आदि भेजे जाते हैं। सावन के महीने में इस दिन झूला झूलने का भी विशेष महत्व है।

पति की लंबी उम्र के लिए बिना पानी का व्रत
हरियाली तीज का नियम है कि क्रोध को मन में न आने दें। इस दिन विवाहित महिलाओं को मायके से आए वस्त्र ही धारण करने चाहिए, साथ ही शृंगार में भी वहीं से आई वस्तुओं का प्रयोग करें। माना जाता है कि जो कुंवारी कन्याएं इस व्रत को रखती हैं उनके विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। इस दिन पति या होने वाले पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखते हैं। व्रत के दौरान पूरे 16 शृंगार करके भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करें। हाथों में नई चूड़ियां, मेहंदी और पैरों में अल्ता लगाएं।

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