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the sun worship in Paush month, makar sankranti 2020, paush month worship tips, surya puja vidhi | पौष मास में सूर्य पूजा के साथ ही पवित्र नदी में स्नान और दान करने की परंपरा, तिल-गुड़ भी जरूर खाएं


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12 दिन पहले

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गुरुवार, 14 जनवरी को सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करेगा। इस दिन मकर संक्रांति है और सूर्य उत्तरायण हो जाएगा। ये सूर्य पूजा का महापर्व है। हिन्दी पंचांग के अनुसार अभी पौष मास चल रहा है। इस मास में सूर्यदेव की आराधना करने की परंपरा है। पौस मास में रोज और खासतौर पर मकर संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान के बाद दान-पुण्य भी किया जाता है। माह में तिल का दान भी करना चाहिए।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक सूर्य नौ ग्रहों का राजा है और अभी धनु राशि में स्थित है। 14 जनवरी को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा और खरमास खत्म हो जाएगा। खरमास में किसी भी तरह के मांगलिक कर्म नहीं किए जाते हैं। गुरुवार, 28 जनवरी तक पौष मास रहेगा। जानिए इस माह में कौन-कौन से शुभ काम करना चाहिए…

सुबह जल्दी उठें और सूर्य को जल चढ़ाएं

पौष मास में ठंड पूरे प्रभाव में रहती है। इस माह सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर्मों के बाद सूर्य को जल चढ़ाना चाहिए। इससे कुंडली में सूर्य दोष शांत होते हैं। साथ ही, ये सुबह जल्दी उठना और सूर्य पूजा करना स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है।

मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा

मकर संक्रांति से ठंड का असर कम होना शुरू हो जाता है। मकर संक्रांति पर सूर्य की किरणें हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद रहती हैं। इसी वजह से इस दिन पतंग उड़ाने की परंपरा है। मकर संक्रांति पर कुछ देर धूप में जरूर बैठना चाहिए।

खाने में तिल-गुड़ शामिल करें और दान करें

तिल-गुड़ के सेवन से शरीर को ठंड से बचने में मदद मिलती है। तिल और गुड़ की तासीर गर्म होती है जो कि हमारे शरीर को गर्मी प्रदान करती है। तिल-गुड़ की इसी विशेषता को ध्यान में रखते हुए पौष मास में और खासतौर पर मकर संक्रांति पर इनका सेवन किया जाता है।

संक्रांति पर तिल का दान करने से कुंडली के कई ग्रह दोष दूर होते हैं। विशेष रूप से कालसर्प योग, शनि की साढ़ेसाती और ढय्या, राहु-केतु के दोष दूर करने के लिए मकर संक्रांति पर तिल का दान जरूर करना चाहिए।



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