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The virus is not going anywhere now, it will become a seasonal disease, only then we will get rid of masks | वायरस अभी कहीं नहीं जाने वाला, यह मौसमी बीमारी बन जाएगा, तभी हमें मास्क से छुटकारा मिलेगा


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चंडीगढ़18 मिनट पहले

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डॉक्टर गुलेरिया ने कहा कि वायरस अब कहीं नहीं जाने वाला है। - Dainik Bhaskar

डॉक्टर गुलेरिया ने कहा कि वायरस अब कहीं नहीं जाने वाला है।

  • ‘कोविड-19 महामारी से हमने क्या सीखा और हम क्या कर सकते हैं’ इस पर ऑनलाइन लेक्चर में बोले एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया

‘कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए खतरनाक साबित होगी, इसका कोई साइंटिफिक आधार नहीं है। ये बात सिर्फ इसलिए कही जा रही थी, क्योंकि उस समय तक ज्यादातर बालिग लोगों को वैक्सीन लग चुकी होगी। एम्स की स्टडी के अनुसार 50 से 60 फीसदी बच्चों को कोविड हो चुका है, जिसका पता भी नहीं लगा।

एम्स और पीजीआई की स्टडी देखें तो तीसरी लहर में भी बच्चों को माइल्ड इंफेक्शन होगा, लेकिन मृत्यु दर की संभावना काफी कम है’। यह कहना एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया का। वे शुक्रवार को पीयू के डिपार्टमेंट ऑफ माइक्रोबायोलॉजी की ओर से कराए गए ‘कोविड-19 महामारी से हमने क्या सीखा और हम क्या कर सकते हैं’ विषय पर लेक्चर दे रहे थे। डॉक्टर गुलेरिया ने कहा कि वायरस अब कहीं नहीं जाने वाला है। इस ऑनलाइन सेशन की अध्यक्षता पूर्व डीन साइंस प्रो. प्रिंस शर्मा ने की।

डॉ. गुलेरिया ने कहा- कोविड प्रोटोकॉल का पालन हो तो तीसरी लहर में खतरा कम हो जाएगा

  • चंडीगढ़ में लगभग 70% आबादी को वैक्सीन लग चुकी है और लोग मास्क भी पहन रहे हैं। इसके बावजूद अगर इंफेक्शन का खतरा है तो वैक्सीनेशन का फायदा क्या?

अभी तक आई कोई भी वैक्सीन हमें इंफेक्शन से नहीं बचाती, लेकिन ये बीमारियों को गंभीर होने से बचाती है, इसलिए ही वैक्सीन जरूरी है। वैक्सीनेशन के बाद भी इंफेक्शन का खतरा रहता है और वैक्सीनेट हुआ व्यक्ति दूसरों को संक्रमित कर सकता है, इसलिए मास्क पहनना भी जरूरी है। बेशक हमारे देश में सघन आबादी और कई अभाव के कारण उचित दूरी पूरी तरह संभव नहीं होती, लेकिन मास्क लगाकर और हाथ साफ रखने से इंफेक्शन पर कंट्रोल पा सकते हैं।

  • जिंदगी सामान्य कब होगी?

कोरोना वायरस अब कहीं नहीं जाने वाला है, ये हमारी जिंदगी का हिस्सा है। जब हर्ड इम्युनिटी आ जाएगी तो केस इतने नहीं बढ़ेंगे। ये मौसमी बीमारी बन जाएगी, तभी हमें मास्क से छुटकारा मिलेगा। ये कब तब होगा, इस पर अभी टिप्पणी नहीं की जा सकती।

  • कोविड को लेकर सेकेंडरी बैक्टीरियल इंफेक्शन के प्रति लोग चिंतित हैं, क्या कहेंगे?

सिर्फ बैक्टीरियल ही नहीं सेकेंडरी फंगस इंफेक्शन भी चिंता की बात हैं। म्युरोमाइकोसिस के बढ़ते हुए केस इसी की ओर से इशारा है। दोनों तरह के इंफेक्शन चिंता की बात हैं और इसके लिए भी व्यक्तिगत और प्रशासनिक दोनों स्तर पर मैनेजमेंट की जरूरत है। लोगों ने बिना डॉक्टर की राय से, माइल्ड इंफेक्शन और होम आइसोलेशन के दौरान बिना डॉक्टर की पर्ची के स्टेरॉयड लिए हैं, जो नहीं होना चाहिए। डॉक्टरों, प्रशासन और लोगों को सावधानी बरतनी होगी।

  • डेल्टा प्लस वैरिएंट को क्या ‘वैरिएंट ऑफ कन्सर्न’ कहा जा सकता है?

अल्फा वैरिएंट पहले आए कोरोना से दोगुना इंफेक्शियस था और डेल्टा प्लस इससे 50% ज्यादा। लेकिन डेल्टा प्लस पर टिप्पणी करने के लिए फिलहाल ज्यादा डाटा उपलब्ध नहीं है। न ही पता है कि यह कितना खतरनाक होगा इसलिए फिलहाल इसको ‘वैरिएंट ऑफ कनसर्न’ कहना ठीक नहीं है।

  • बच्चों में लगातार मानसिक समस्याएं बढ़ रही हैं, आपका क्या कहना है?

निश्चय ही स्कूल बंद हैं और बच्चों को बाहर जाने की मंजूरी नहीं है, इसलिए उनमें ये दिक्कतें बढ़ रही हैं। मानसिक समस्याएं सभी में बढ़ी हैं। पिछले कुछ समय में महामारी ने सभी के दिल और दिमाग पर बुरा प्रभाव डाला है, इसलिए मेंटल हेल्थ की दिशा में भी काम करना होगा।

  • दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से क्या सीखा?

ऑक्सीजन के नए प्लांट लगाए गए हैं और ऐसा इंतजाम है कि अगली बार इसकी कमी ना आए। इसके अलावा ये जरूरी है कि हर एरिया में स्वास्थ्य सुविधाओं का बराबर बंटवारा हो। लोगों को पता रहना चाहिए कि बेड कहां पर उपलब्ध हैं।

  • क्या लोग लापरवाह हो रहे हैं?

वैक्सीनेशन को लेकर लोगों में भ्रम, वैक्सीनेशन की कम उपलब्धता, छुट्टियां मनाने निकली लोगों की भीड़, जिसमें से किसी-किसी ने ही मास्क पहना होता है। यह खतरनाक है। ऐसे लोग ही तीसरी लहर को जल्द लाएंगे, साथ ही नए वैरिएंट का कारण भी बन सकते हैं।

  • तीसरी लहर को रोकने के लिए क्या कोशिश की जानी चाहिए?

एक कोशिश इंडिविजुअल लेवल पर है कि आप ऐसे बड़े फंक्शन न करें, भीड़ न करें, जिससे इंफेक्शन बढ़ने का खतरा हो। वैक्सीन जरूर लगवाएं। कोविड प्रोटोकॉल का पालन करें। दूसरी कोशिश है प्रशासनिक स्तर पर। कड़ी निगरानी बेहद जरूरी है।

जिस एरिया में लगे कि 5 फीसदी से ज्यादा कोरोना पॉजिटिव केस आ रहे हैं, वहां सख्ती होनी चाहिए। मिनी और सिर्फ एरिया वाइज लॉकडाउन और मैनेजमेंट जरूरी है। अगर भीड़ नहीं होगी तो उसमें आपस में इंफेक्शन फैलने का खतरा नहीं रहेगा।

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