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To protect our Vedic language, Sanskrit texts, took a pledge by tying a rakhi; New initiative of Sanskrit scholars, Dharmacharyas, Mahants, Pandits on Raksha Bandhan | संस्कृत हमारी वैदिक भाषा, ग्रंथों की रक्षा के लिए राखी बांधकर लिया संकल्प; रक्षाबंधन पर संस्कृत विद्वानों,ज्योतिषाचार्यों,पंडितों की नई पहल


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जयपुर14 घंटे पहले

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संस्कृत ग्रंथों के रक्षा सूत्र बांधकर की नई पहल - Dainik Bhaskar

संस्कृत ग्रंथों के रक्षा सूत्र बांधकर की नई पहल

आज रक्षाबंधन के साथ ही संस्कृत दिवस भी है। संस्कृत ज्ञान की रक्षा और संरक्षण के लिए जयपुर में संस्कृत विद्वानों, ज्योतिषियों, धर्माचार्यों, पंडितों ने ग्रंथों के राखी बांधकर एक नई पहल की है। ताकि भावी पीढ़ियों तक संस्कृत में लिखे ज्ञान, विज्ञान, धर्मशास्त्रों का लगातार प्रवाह होता रहे। वैदिक ज्ञान का प्रचार प्रसार हो।संस्कृत,संस्कार और धर्म की रक्षा हो सके।

ज्योतिष परिषद एवं शोध संस्थान के अध्यक्ष पंडित पुरूषोत्तम गौड़ ने रक्षा बंधन पर्व पर विधिवत पूजा कर ‘धर्म सिंधु’, ‘निर्णय सिंधु’, ‘सिद्ध विद्या रहस्य’ सहित अन्य धार्मिक ग्रंथों के रक्षा सूत्र बांधा। साथ ही इन ग्रंथों और धार्मिक ज्ञान की संस्कृत पुस्तकों के संरक्षण और ज्योतिष विद्यार्थियों को उनके ज्ञान से अवगत करवाने का संकल्प लिया। पंच सिद्धान्तिका में वर्णित पांच ज्योतिष सिद्धांत ग्रंथों का पूजन किया। रक्षा सूत्र बांधते समय मंत्रोच्चारण किया गया।

दुपट्टा धारण कराकर विधिवत पूजन किया।

दुपट्टा धारण कराकर विधिवत पूजन किया।

सरस निकुंज के प्रवक्ता प्रवीण भैया ने शुक संप्रदाय पीठाधीश्वर अलबेली माधुरी शरण महाराज के सान्निध्य में शुक संप्रदाय की परंपरागत ‘आचार्य वाणी’, ‘श्री भक्ति सागर ‘, ‘श्री सरस सागर’ , ‘श्रीमद् भागवत महापुराण’, ‘श्री भक्ति रस मंजरी’, ‘ श्री नव भक्तमाल’, ‘ श्री रामचरितमानस पर रक्षा सूत्र बांधा। साथ ही नारियल मेवा का भोग और दुपट्टा धारण कराकर विधिवत पूजन किया।

वैदिक ज्ञान का प्रचार प्रसार हो।संस्कृत,संस्कार और धर्म की रक्षा हो सके।

वैदिक ज्ञान का प्रचार प्रसार हो।संस्कृत,संस्कार और धर्म की रक्षा हो सके।

श्री भृगु ज्योतिष शोध संस्थान के ज्योतिषाचार्य व धर्मशास्त्री पण्डित प्रह्लाद शास्त्री ने ‘श्रीमद्भागवत गीता’ के साथ ही ज्योतिष,कर्मकाण्ड और धर्मशास्त्र पर स्वरचित पुस्तक ‘व्यवहारिक ज्ञान’ को रक्षा सूत्र के रूप में ‘राम राखी’ बांधी। महाभारत का युद्ध आरम्भ होने के ठीक पहले भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जो उपदेश दिया, वह श्रीमद्भगवदगीता के नाम से प्रसिद्ध है। यह महाभारत के भीष्मपर्व का अंग है। गीता में 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। गीता की गणना प्रस्थानत्रयी में की जाती है, जिसमें उपनिषद् और ब्रह्मसूत्र भी सम्मिलित हैं। यह मूल रूप से संस्कृत भाषा में है।

सर्व ब्राह्मण महासभा अध्यक्ष पंडित सुरेश मिश्रा ने श्री गणेश सहस्त्रनाम स्तोत्र के रक्षासूत्र बांधा

सर्व ब्राह्मण महासभा अध्यक्ष पंडित सुरेश मिश्रा ने श्री गणेश सहस्त्रनाम स्तोत्र के रक्षासूत्र बांधा

सर्व ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष पंडित सुरेश मिश्रा ने रक्षाबंधन के अवसर पर श्री गणेश सहस्त्रनाम स्तोत्र के रक्षा सूत्र बांधकर इसे कंठस्थ रखने और भावी पीढ़ी को भी इसके महत्व से अवगत करवाने का संकल्प लिया। भगवान श्रीगणेश देवताओं में प्रथम पूज्य माने गए हैं। यानी किसी भी शुभ कार्य से पूर्व गणपतिजी की पूजा की जाती है। वेद-पुराणों में भी गणेशजी के विभिन्न स्तोत्र, मंत्र और पूजन आदि का वर्णन मिलता है।

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