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Today the Sun will enter Ardra Nakshatra, the rainy season will start, the sum of changes in the political and economic situation of the country | शुरू होगा बारिश का मौसम, देश की राजनैतिक और आर्थिक स्थिति में बदलाव के योग


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21 घंटे पहले

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  • सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में आने पर अर्घ्य देने की परंपरा, इससे खत्म होती है बीमारियां और बढ़ती है उम्र

ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष की द्वादशी पर यानी आज सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश कर रहा है। जो कि 6 जुलाई तक रहेगा। इन 15 दिनों में ज्येष्ठ और आषाढ़ महीना रहेगा। ज्योतिषीयों का कहना है कि सूर्य के इस नक्षत्र परिवर्तन से बारीश का मौसम शुरू हो जाएगा। ज्योतिष में सूर्य के राशि और नक्षत्र बदलने पर खास ध्यान दिया जाता है। इस साल आर्द्रा के प्रवेश-काल के आधार पर ज्योतिषीय गणना के मुताबिक अच्छी बारिश के योग बन रहे हैं।

सूर्य की चाल में बदलाव से देश-दुनिया की राजनैतिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ेगा। इसके प्रभाव से देश में बड़े प्रशासनिक फैसले हो सकते हैं। देश में कई जगहों पर तेज बारिश के कारण प्राकृतिक आपदा आने की आशंका है। साथ ही देश में राजनीतिक और आर्थिक उथल-पुथल भी हो सकती है।

सूरज को अर्घ्य देने से बढ़ेगी उम्र
सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में आने पर खीर-पूड़ी और कई तरह के पकवान बनाकर उगते सूरज को अर्घ्य देकर पूजा और स्वागत करते हैं। माना जाता है कि इस परंपरा से बीमारियां दूर होती है और उम्र भी बढ़ती है। काशी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र का कहना है कि आर्द्रा नक्षत्र पर राहु का विशेष प्रभाव रहता है। जो कि मिथुन राशि में आता है। जब सूर्य सूर्य इस नक्षत्र में होता है तब पृथ्वी रजस्वला होती है। ये नक्षत्र उत्तर दिशा का स्वामी है। इसे खेती के कामों में मददगार माना जाता है।

सूर्य की चाल से ही बदलती हैं ऋतुएं
सूर्य किसी भी राशि में महीने तक रहता है। इस तरह 2 राशियां बदलने पर ऋतुओं में भी बदलाव हो जाता है। जैसे 19 अप्रैल से 21 जून तक वृष और मिथुन राशि में सूर्य के रहने से इस दौरान ग्रीष्म ऋतु रहती है। जबकि सूर्य मिथुन से कर्क राशि में जाते हैं तो बारिश का मौसम शुरू हो जाता है। जो कि 22 अगस्त तक रहेगा।

सूर्य के कन्या और तुला राशि में होने पर शरद ऋतु रहेगी, जो 22 अगस्त से 23 अक्टूबर तक रहेगी। फिर वृश्चिक और धनु राशि में होने पर 23 अक्टूबर से 21 दिसंबर तक हेमंत ऋतु और उसके बाद मकर और कुंभ राशि में रहने पर 21 दिसम्बर से 18 फरवरी तक शिशिर ऋतु होगी।

सूर्य को संसार की आत्मा कहते हैं
डॉ. मिश्र बताते हैं कि ज्योतिष और भारतीय संस्कृति में सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। भगवान सूर्य ऊर्जा के प्रतिक हैं और आरोग्य के कारक हैं। साथ ही भगवान सूर्य को संसार की आत्मा कहा जाता है और यह प्रकृति का केन्द्र हैं। सूर्य के नक्षत्र परिवर्तन के दिन साधु-संतों के साथ ब्राह्मणों व गरीबों को भोजन कराकर व वस्त्र दान करने के साथ गायों को हरा चारा खिलाना चाहिए। पक्षियों के लिए घौसले भी लगाने चाहिए। विष्णु और शिव की कृपा अपने भक्तों पर हमेशा बनी रहती है।

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