Most Popular

Rode had delivered three tiffin bombs, one experimented in Ajnala, security agencies in search of two, Ruble gave many important information, was found in Ambala from a Pakistani national | गुरमुख सिंह रोडे के सप्लाई किए गए 3 में से दो बमों की तलाश में जुटी सुरक्षा एजेंसियां, रूबल ने अंबाला में पाक नागरिक से मिलने समेत किए कई खुलासे

Social Media

Get The Latest Updates

Subscribe To Our Weekly Newsletter

No spam, notifications only about new products, updates.

Today’s fast festival is on the next day of Devshayani Ekadashi, worship of Lord Vaman, the fifth incarnation of Vishnu. | देवशयनी एकादशी के अगले दिन होती है विष्णुजी के पांचवे अवतार भगवान वामन की पूजा


  • Hindi News
  • Jeevan mantra
  • Dharm
  • Today’s Fast Festival Is On The Next Day Of Devshayani Ekadashi, Worship Of Lord Vaman, The Fifth Incarnation Of Vishnu.

17 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक
  • आषाढ़ महीने के देवता हैं भगवान वामन इसलिए इस महीने द्वादशी तिथि पर होती हैं इनकी विशेष पूजा

बुधवार, 21 जुलाई को द्वादशी तिथि पर विष्णुजी के पांचवे अवतार भगवान वामन की पूजा और व्रत किया जाएगा। हिंदू कैलेंडर में आषाढ़ महीने के देवता भगवान वामन ही हैं। इसलिए इस महीने शुक्लपक्ष की द्वादशी तिथि पर इनकी विशेष पूजा और व्रत की परंपरा है। वामन पुराण में बताया गया है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। संतान सुख मिलता है। साथ ही जाने-अनजाने में हुए पाप और शारीरिक परेशानियां भी खत्म हो जाती हैं।

व्रत की विधि स्कंद पुराण के अनुसार सतयुग में भगवान विष्णु ने वामन रूप में अवतार लिया था। वामन द्वादशी पर भगवान विष्णु की या वामनदेव की मूर्ति की विशेष पूजा की जाती है। दक्षिणावर्ती शंख में गाय का दूध लेकर अभिषेक किया जाता है। इस दिन चावल, दही और मिश्री का दान किया जाता है। पूजा के बाद कथा सुननी चाहिए और ब्राह्मण को भोजन करवाने के बाद श्रद्धा अनुसार दान दिया जाना चाहिए।

पूजा विधि सुबह जल्दी उठकर नहाएं और पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़कें। इसके बाद भगवान वामन की पूजा और व्रत का संकल्प लेना चाहिए। पूजा के दौरान शंख में गाय का दूध लेकर भगवान का अभिषेक करना चाहिए। भगवान वामन की मूर्ति न हो तो विष्णुजी का अभिषेक करें। इसके बाद भगवान को नैवैद्य लगाकर आरती करें और प्रसाद बांट दें। पूजा पूरी होने के बाद ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और उन्हें श्रद्धा के मुताबिक दक्षिणा भी देनी चाहिए।

वामन अवतार से जुड़ी कथा सतयुग में असुर बलि ने देवताओं को हराकर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था। इसके बाद सभी देवता भगवान विष्णु से मदद लेने पहुंचे। तब विष्णुजी ने देवमाता अदिति के गर्भ से वामन रूप में अवतार लिया। इसके बाद एक दिन राजा बलि यज्ञ कर रहा था, तब वामनदेव बलि के पास गए और तीन पग धरती दान में मांगी। शुक्राचार्य के मना करने के बावजूद राजा बलि ने वामनदेव को तीन पग धरती दान में देने का वचन दिया। इसके बाद वामनदेव ने विशाल रूप लिया और एक पग में पूरी धरती और दूसरे में स्वर्ग नाप लिया। तीसरा पैर रखने के लिए जगह ही नहीं बची तो बलि ने वामन को अपने ही सिर पर पैर रखने को कहा। वामन देव ने जैसे ही उसके सिर पर पैर रखा, वह पाताल लोक पहुंच गया। बलि की दानवीरता से खुश होकर भगवान ने उसे पाताल का स्वामी बना दिया और सभी देवताओं को स्वर्ग लौटा दिया।

खबरें और भी हैं…



Source link

Share:

Share on facebook
Share on twitter
Share on pinterest
Share on linkedin
Share on whatsapp

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *