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Traffic Police Will Use Irad App To Feed Data Related To Road Accident. – यूपी: ट्रैफिक पुलिस एप पर फीड करेगी दुर्घटनाओं का डाटा, 15 मार्च से होगी योजना की शुरुआत


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उत्तर प्रदेश में इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डाटाबेस (आईआरएडी) एप के जरिए सड़कों के ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए जाएंगे। वहां होने वाले हादसे व उनकी वजह जानने की कोशिश कर उसे दूर कराया जाएगा। इस एप को आईआईएम चेन्नई ने तैयार किया है। इससे सिर्फ प्रदेश ही नहीं, देश भर में होने वाले सड़क हादसों का विश्लेषण किया जा सकेगा।

यातायात निदेशालय ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में 15 मार्च से आईआरएडी एप का इस्तेमाल जरूर करने का निर्देश दिया है। हादसे की जांच करने वाले विवेचक को मौके पर जाकर संबंधित जानकारियां जैसे- हादसे का समय, वजह, घायलों व मृतकों की संख्या, हादसे में कौन सी गाड़ियां शामिल थीं, ये यातायात नियमों का पालन कर रही थीं या नहीं आदि को एप में दर्ज करना होगा। हादसे के समय मौसम कैसा था जैसी जानकारियां भी फीड करनी होंगी। इससे डाटा के विश्लेषण में आसानी होगी।

निदेशालय के एसपी निजाम हसन ने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर यह सेवा 16 जिलों में शुरू की गई थी। शेष 59 जिलों में 15 मार्च से इस एप पर हादसों से संबंधित जानकारी भरने के निर्देश दिए गए हैं।

इस संबंध में एडीजी यातायात अशोक कुमार सिंह ने बुधवार को संबंधित जिलों के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। उन्होंने आईआरएडी एप को लेकर पुलिसकर्मियों को दिए जा रहे प्रशिक्षण के बारे में जानकारी ली।

वहीं, निजाम ने बताया कि 13 मार्च को इसका ड्राई रन किया जाएगा। इसके तहत यह जानने की कोशिश की जाएगी कि प्रशिक्षण के मुताबिक एप में जानकारी भरी जार रही है या नहीं। 15 मार्च से इसे विधिवत शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में आईआरएडी एप को सीसीटीएनएस सर्वर और अस्पतालों के सर्वर से भी जोड़ दिया जाएगा।

उत्तर प्रदेश में इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डाटाबेस (आईआरएडी) एप के जरिए सड़कों के ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए जाएंगे। वहां होने वाले हादसे व उनकी वजह जानने की कोशिश कर उसे दूर कराया जाएगा। इस एप को आईआईएम चेन्नई ने तैयार किया है। इससे सिर्फ प्रदेश ही नहीं, देश भर में होने वाले सड़क हादसों का विश्लेषण किया जा सकेगा।

यातायात निदेशालय ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में 15 मार्च से आईआरएडी एप का इस्तेमाल जरूर करने का निर्देश दिया है। हादसे की जांच करने वाले विवेचक को मौके पर जाकर संबंधित जानकारियां जैसे- हादसे का समय, वजह, घायलों व मृतकों की संख्या, हादसे में कौन सी गाड़ियां शामिल थीं, ये यातायात नियमों का पालन कर रही थीं या नहीं आदि को एप में दर्ज करना होगा। हादसे के समय मौसम कैसा था जैसी जानकारियां भी फीड करनी होंगी। इससे डाटा के विश्लेषण में आसानी होगी।

निदेशालय के एसपी निजाम हसन ने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर यह सेवा 16 जिलों में शुरू की गई थी। शेष 59 जिलों में 15 मार्च से इस एप पर हादसों से संबंधित जानकारी भरने के निर्देश दिए गए हैं।


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पुलिसकर्मियों को दिए जा रहे प्रशिक्षण के बारे में ली जानकारी



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