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Up’s Export Target To Reach Rs 3 Lakh Crore: Siddharth Nath – यूपी का निर्यात तीन लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य : सिद्धार्थनाथ


सिद्धार्थ नाथ सिंह
– फोटो : अमर उजाला

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सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, निवेश और निर्यात प्रोत्साहन मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि वर्चुअल ट्रेड फेयर से उत्पादकों व निर्यातकों को बेहतर अवसर मिलेंगे। वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को अपनी कला व उत्पाद प्रदर्शित कर सकेंगे। अगले तीन साल में प्रदेश से 3 लाख करोड़ के निर्यात का लक्ष्य है। इसे पाने व ब्रांड यूपी को प्रोत्साहित करने के लिए निर्माताओं व निर्यातकों को विशेष सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। उन्होंने ये बातें मंगलवार को खादी भवन में 15 दिवसीय वर्चुअल ट्रेड फेयर के उद्घाटन के मौके पर कही।

मंत्री ने कहा कि भारत के कुल निर्यात में यूपी की सहभागिता 4.55 फीसदी है। यहां से 45 फीसदी हस्तशिल्प, 39 फीसदी कालीन और 26 फीसदी चर्म उत्पादों का निर्यात किया जाता रहा है। पिछले तीन साल में 38 फीसदी वृद्धि के साथ निर्यात 84 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 1.20 लाख करोड़ रुपये गया है।

उन्होंने कहा कि राज्य से इंजीनियरिंग तथा खेलकूद सामग्री, रक्षा उपकरणों, कृषि प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्यात को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा सरकार ने प्राथमिकता वाली सेवाक्षेत्रों जैसे शिक्षा, पर्यटन, आईटी, लॉजिटिस्क आदि भी चयन किया है।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जिलों के हस्तशिल्पियों और निर्यातकों से संवाद भी किया गया है। इंडियन एथनिक उत्पादन से जुड़ी वाराणसी की अंगिका, नोएडा से वेस्टर्न अपैरल उत्पाद क्षेत्र की सौन्या मलिक, ल्यालापुर यूनिफॉर्म के प्रबंध निदेशक केडी छुग और मैकसेम की निदेशक शैल्या लाल ने विचार रखे। साथ ही लखनऊ के वीरसन की फाउंडर आकर्षि जैन, बाराबंकी के यश इंटरप्राइजेज की फाउंडर इशिता अग्रवाल, त्रिवेणी चिकन आर्ट लखनऊ के फाउंडर नितीश अग्रवाल और कानपुर से अल्ट्राब्लेज के प्रबंध निदेशक आचार्या ने सुझाव दिए। 

निर्यात के लिए भाड़ा अनुदान में बढ़ोतरी
सिद्धार्थनाथ ने कहा कि निर्यात प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया गया है। निर्यातकों के अनिवार्य प्रमाणीकरण पर किए गए व्यय का 50 प्रतिशत और अधिकतम 2 लाख रुपये प्रति इकाई प्रति वर्ष देने का प्रावधान किया गया है। गेट-वे पोर्ट तक निर्यात के लिए भेजे गए माल भाड़े के अनुदान में वृद्धि की गई है।

साथ ही वायुयान भाड़ा युक्तिकरण योजना में इस आर्थिक सीमा को दो लाख रुपये से बढ़ाकर प्रति वर्ष प्रति इकाई पांच लाख रुपये किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल और लोकल फॉर ग्लोबल नीति और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से इसके प्रभावी क्रियान्वयन के कारण औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि हुई है।

तीन श्रेणियों के उत्पादों के लिए ट्रेड फेयर : सहगल
अपर मुख्य सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम डॉ. नवनीत सहगल ने कहा कि यह ट्रेड फेयर मुख्य रूप से तीन श्रेणियों के उत्पादों के लिए आयोजित किया जा रहा है। 8 से 12 मार्च तक पहले ट्रेड फेयर में टेक्सटाइल व सिले हुए वस्त्रों, 15 से 19 मार्च तक दूसरे ग्लोबल ऑनलाइन शो में कालीन, दरी, चर्म उत्पाद व जूते-चप्पल और 22 से 26 मार्च तक तीसरे शो में घरेलू व सौंदर्य प्रसाधन से जुड़े उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा। प्रत्येक ट्रेड फेयर में 100 से अधिक निर्यातक भाग लेंगे। साथ ही देश-विदेश के 300 से अधिक खरीदारों को ऑन बोर्ड किया गया है। इसके अलावा परस्पर संवाद भी होंगे।

60 देशों के 320 खरीदारों ने फेयर में दिखाई रुचि
वर्चुअल ट्रेड फेयर में यूपी के 23 शहरों के 120 उत्पादकों ने पंजीकरण कराया है। जबकि 60 देशों के 320 खरीदारों ने रुचि दिखाई है। इनमें ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, न्यूजीलैंड, अफ्रीका समेत विभिन्न देशों के खरीदार शामिल हैं।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, निवेश और निर्यात प्रोत्साहन मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि वर्चुअल ट्रेड फेयर से उत्पादकों व निर्यातकों को बेहतर अवसर मिलेंगे। वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को अपनी कला व उत्पाद प्रदर्शित कर सकेंगे। अगले तीन साल में प्रदेश से 3 लाख करोड़ के निर्यात का लक्ष्य है। इसे पाने व ब्रांड यूपी को प्रोत्साहित करने के लिए निर्माताओं व निर्यातकों को विशेष सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। उन्होंने ये बातें मंगलवार को खादी भवन में 15 दिवसीय वर्चुअल ट्रेड फेयर के उद्घाटन के मौके पर कही।

मंत्री ने कहा कि भारत के कुल निर्यात में यूपी की सहभागिता 4.55 फीसदी है। यहां से 45 फीसदी हस्तशिल्प, 39 फीसदी कालीन और 26 फीसदी चर्म उत्पादों का निर्यात किया जाता रहा है। पिछले तीन साल में 38 फीसदी वृद्धि के साथ निर्यात 84 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 1.20 लाख करोड़ रुपये गया है।

उन्होंने कहा कि राज्य से इंजीनियरिंग तथा खेलकूद सामग्री, रक्षा उपकरणों, कृषि प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्यात को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा सरकार ने प्राथमिकता वाली सेवाक्षेत्रों जैसे शिक्षा, पर्यटन, आईटी, लॉजिटिस्क आदि भी चयन किया है।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जिलों के हस्तशिल्पियों और निर्यातकों से संवाद भी किया गया है। इंडियन एथनिक उत्पादन से जुड़ी वाराणसी की अंगिका, नोएडा से वेस्टर्न अपैरल उत्पाद क्षेत्र की सौन्या मलिक, ल्यालापुर यूनिफॉर्म के प्रबंध निदेशक केडी छुग और मैकसेम की निदेशक शैल्या लाल ने विचार रखे। साथ ही लखनऊ के वीरसन की फाउंडर आकर्षि जैन, बाराबंकी के यश इंटरप्राइजेज की फाउंडर इशिता अग्रवाल, त्रिवेणी चिकन आर्ट लखनऊ के फाउंडर नितीश अग्रवाल और कानपुर से अल्ट्राब्लेज के प्रबंध निदेशक आचार्या ने सुझाव दिए। 

निर्यात के लिए भाड़ा अनुदान में बढ़ोतरी

सिद्धार्थनाथ ने कहा कि निर्यात प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया गया है। निर्यातकों के अनिवार्य प्रमाणीकरण पर किए गए व्यय का 50 प्रतिशत और अधिकतम 2 लाख रुपये प्रति इकाई प्रति वर्ष देने का प्रावधान किया गया है। गेट-वे पोर्ट तक निर्यात के लिए भेजे गए माल भाड़े के अनुदान में वृद्धि की गई है।

साथ ही वायुयान भाड़ा युक्तिकरण योजना में इस आर्थिक सीमा को दो लाख रुपये से बढ़ाकर प्रति वर्ष प्रति इकाई पांच लाख रुपये किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल और लोकल फॉर ग्लोबल नीति और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से इसके प्रभावी क्रियान्वयन के कारण औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि हुई है।

तीन श्रेणियों के उत्पादों के लिए ट्रेड फेयर : सहगल

अपर मुख्य सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम डॉ. नवनीत सहगल ने कहा कि यह ट्रेड फेयर मुख्य रूप से तीन श्रेणियों के उत्पादों के लिए आयोजित किया जा रहा है। 8 से 12 मार्च तक पहले ट्रेड फेयर में टेक्सटाइल व सिले हुए वस्त्रों, 15 से 19 मार्च तक दूसरे ग्लोबल ऑनलाइन शो में कालीन, दरी, चर्म उत्पाद व जूते-चप्पल और 22 से 26 मार्च तक तीसरे शो में घरेलू व सौंदर्य प्रसाधन से जुड़े उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा। प्रत्येक ट्रेड फेयर में 100 से अधिक निर्यातक भाग लेंगे। साथ ही देश-विदेश के 300 से अधिक खरीदारों को ऑन बोर्ड किया गया है। इसके अलावा परस्पर संवाद भी होंगे।

60 देशों के 320 खरीदारों ने फेयर में दिखाई रुचि

वर्चुअल ट्रेड फेयर में यूपी के 23 शहरों के 120 उत्पादकों ने पंजीकरण कराया है। जबकि 60 देशों के 320 खरीदारों ने रुचि दिखाई है। इनमें ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, न्यूजीलैंड, अफ्रीका समेत विभिन्न देशों के खरीदार शामिल हैं।



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