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Uttarakhand Political Crisis Latest News Update। Trivinder Singh Rawat will stay in Uttarakhand or will go। CM Trivendra Singh Rawat, Raman Singh, Dhan Singh Rawat, Satpal Maharaj, Uttarakhand New CM | पार्लियामेंट्री बोर्ड लेगा फैसला, उत्तराखंड में अभी तक केवल एक CM ने पूरा किया है अपना कार्यकाल


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मुंबई14 मिनट पहले

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2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी। इसके बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत को 18 मार्च 2017 को मुख्यमंत्री बनाया गया। तब से वे इस पद पर हैं। -फाइल फोटो - Dainik Bhaskar

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी। इसके बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत को 18 मार्च 2017 को मुख्यमंत्री बनाया गया। तब से वे इस पद पर हैं। -फाइल फोटो

भाजपा नेतृत्व ने उत्तराखंड में पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर फेरदबल करने का मन बना लिया है। माना जा रहा है कि इसके बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की मुख्यमंत्री पद से छुट्टी तय है। रिपोर्ट पर आखिरी फैसला पार्लियामेंट्री बोर्ड को करना है। सन 2000 में राज्य के गठन के बाद से कांग्रेस के नारायण दत्त तिवारी के अलावा कोई भी मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सका है।

इससे पहले खबर आई थी कि मुख्यमंत्री बदलने का फैसला मई तक शांत पड़ सकता है। इसके पीछे की वजह पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव को बताया जा रहा है। पार्टी आलाकमान नहीं चाहता की विपक्ष को बैठे-बिठाए मौका मिल जाए। वहीं मंगलवार को उत्तराखंड के पार्टी इंचार्ज का बयान भी मुख्यमंत्री को राहत देने वाला है।

पार्टी इंचार्ज दुष्यंत कुमार गौतम का कहना है कि वो अच्छा काम कर रहे हैं। उनके खिलाफ किसी भी तरह के भ्रष्टाचार के आरोप नहीं है। उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाना सही नहीं है। इसके अलावा पार्टी नेतृत्व ने इस मुद्दे पर चर्चा करने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार के विकल्प के जरिए विवाद को खत्म करने के भी संकेत दिए हैं।

इससे पहले पार्टी में रावत को हटाने की मांग कर रहे विधायकों को आलाकमान चुनाव तक चुप रहने की हिदायत दे चुकी है। पार्टी के इन विधायकों ने मांग की थी कि अगर CM फेस नहीं बदला गया तो अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

राज्य के गठन के बाद से ही अस्थिरता का माहौल रहा है
2000 में राज्य के गठन के बाद से कांग्रेस के नारायण दत्त तिवारी के अलावा कोई भी मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है। राज्य में भाजपा का तीसरी बार मुख्यमंत्री बना है। लेकिन पार्टी का एक भी मुख्यमंत्री पांच साल तक कुर्सी पर नहीं रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय उत्तराखंड में पहली बार भाजपा सरकार बनी थी।

उत्तरप्रदेश से अलग होने के बाद उत्तराखंड में भाजपा की सरकार बनी। इस दौरान दो साल के भीतर ही दो मुख्यमंत्री बन गए। सबसे पहले नित्यानंद स्वामी 9 नवंबर 2000 को मुख्यमंत्री बने। इसके एक साल बाद भाजपा के नेताओं ने उनके खिलाफ मोर्च खोल दिया। उन्हें 29 अक्टूबर 2001 को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद भाजपा ने उस समय के दिग्गज नेता भगत सिंह कोश्यारी को विधायक दल का नेता चुना।

कोशियारी ने 30 अक्टूबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद वह 1 मार्च 2002 तक राज्य की मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रहे। 2002 में विधानसभा चुनाव हुए। इसमें भाजपा कोश्यारी के नेतृत्व में राज्य का चुनाव लड़ी थी। इस चुनाव में सत्ता भाजपा के हाथ से खिसकर कांग्रेस के पास चली गई। कोश्यारी 123 दिन तक ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। 2002 चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद नारायण दत्त तिवारी मुख्यमंत्री बने और पांच साल यानी 2007 तक मुख्यमंत्री रहे।

2007 में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा को राज्य में पूर्ण बहुमत मिला। इस दौरान पांच साल के कार्यकाल में तीन बार मुख्यमंत्री का चेहरा बदला गया। 8 मार्च 2007 को भाजपा ने भुवनचंद्र खंडूरी मुख्यमंत्री बने, लेकिन 23 जून 2009 को उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद उनकी जगह 24 जून 2009 को भाजपा ने रमेश पोखरियाल निशंक को मुख्यमंत्री बनाया। लेकिन चुनाव से 4 महीने पहले उनकी कुर्सी चली गई। उनकी जगह दोबारा 10 सितंबर 2011 को भुवन चंद्र खंडूर को मुख्यमंत्री बनाया गया। लेकिन 2012 के चुनाव में भाजपा की वापसी नहीं हुई। कांग्रेस की सरकार बनी।

5 साल में दो मुख्यमंत्री बदले गए। 13 मार्च 2012 को विजय बहुगुणा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, इसके दो साल बाद उन्हें कुर्सी छोड़ने पड़ी। 1 फरवरी 2014 को हरीश रावत मुख्यमंत्री बने। लेकिन पार्टी की अंदर खाने की राजनीति से जूझ रहे हरीश रावत को विधायकों की बगावत के बाद पद से इस्तीफा देना पड़ा। 2016 में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा।

रावज को कोर्ट से राहत मिली और वे फिर मुख्यमंत्री बने। 2017 में फिर से राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ। भाजपा की सरकार बनी। इसके बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत को 18 मार्च 2017 को मुख्यमंत्री बनाया गया। तब से वह राज्य में मुख्यमंत्री हैं। त्रिवेंद्र सिंह राज्य की सत्ता में सबसे ज्यादा सत्ता तक मुख्यमंत्रियों रहने वाले मुख्यमंत्रियों में से एक हैं, लेकिन 4 साल बाद ही अब उनकी कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है।

शीर्ष नेताओं की बैठक के बाद सीएम बदलने की चर्चा तेज
सोमवार को दिनभर चले संगठन के शीर्ष नेताओं की बैठक के बाद यह चर्चा थी कि सीएम बदलने को लेकर फैसला आ सकता है। पार्टी राज्य में किसी नए चेहरे को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंप सकती है। इससे पहले मुख्यमंत्री रावत को भी पार्टी ने सोमवार को दिल्ली तलब किया था। रावत सोमवार को राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण जाने वाले थे, लेकिन वे अपना दौरा रद्द कर दिल्ली पहुंच गए।

उन्होंने दोपहर में पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्‌डा से मुलाकात की। इस बीच, देर शाम तक नड्‌डा और गृह मंत्री अमित शाह के बीच महत्वपूर्ण बैठक चली। इसमें संगठन महामंत्री बीएल संतोष भी शामिल हुए। रावत को फिर एक बार नड्‌डा ने रात 9:15 बजे अपने आवास पर बुलाया। इसके पहले खबर आई कि उत्तराखंड में पार्टी विधायक दल की एक बैठक मंगलवार को बुलाई गई है। यह बैठक देहरादून में सीएम हाउस में होने वाली है।

इधर, देर रात राज्य के भाजपा विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने बताया कि सीएम रावत को लेकर विधायकों में किसी भी प्रकार की नाराजगी नहीं है। पार्टी ने विधायक दल की कोई बैठक भी नहीं बुलाई है। उन्हें हटाने की खबरें गलत हैं। वे मुख्यमंत्री बने रहेंगे। रावत कल दिल्ली से देहरादून लौट आए हैं।

सीएम की रेस में राज्य के दो मंत्री के नाम की चर्चा
इस बीच, CM की रेस में राज्य के दो मंत्री धनसिंह रावत और सतपाल महाराज का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। वहीं, चर्चा ये भी है कि अगर दोनों में से किसी एक नाम पर सहमति नहीं बनी तो नैनीताल से सांसद अजय भट्ट और राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी में से किसी एक को राज्य की बागडोर सौंपी जा सकती है।

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