Uttarakhand Tragedy Survivor Story; Man Risks Life to Save 12 Worker, Who Trapped In Tunnel After Glacier Burst | एक फोन कॉल ने टनल में फंसे 12 लोगों की जान बचाई; उम्मीद खो चुके लोगों को ITBP ने 7 घंटे में बचाया


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जोशीमठ19 मिनट पहले

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फोटो उस टनल की है, जहां से 12 वर्कर्स को 7 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद निकाला गया। - Dainik Bhaskar

फोटो उस टनल की है, जहां से 12 वर्कर्स को 7 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद निकाला गया।

उत्तराखंड में रविवार को ग्लेशियर टूटने से भारी तबाही हुई। उस वक्त तपोवन इलाके की एक अंडरग्राउंड टनल में करीब 12 लोग मौजूद थे। अचानक आई बाढ़ की वजह से टनल में पानी और मलबा जमा हो गया। लाख कोशिशों के बाद भी उन्हें बाहर निकलने का कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था। सभी उम्मीद हार चुके थे। तभी वहां मौजूद एक व्यक्ति ने अपने मोबाइल से अधिकारियों से संपर्क किया और इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) की मदद से सभी को सही सलामत बचाया जा सका।

जब तक कुछ समझ पाते टनल मलबे से भर गई
टनल से रेस्क्यू किए गए तपोवन पावर प्रोजेक्ट के वर्कर लाल बहादुर के हवाले से न्यूज एजेंसी ने बताया कि हमने देखा कि एक व्यक्ति चिल्ला रहा था कि बाहर आओ। जब तक हम कुछ कर पाते, भारी मात्रा में पानी और मलबा हमारी ओर आने लगा।

बहादुर के साथ 11 लोगों को टनल से ITBP ने रेस्क्यू किया। अधिकारियों ने बताया कि वे वहां करीब 7 घंटे तक (सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक) फंसे हुए थे। सभी काे हादसे की जगह से करीब 25 किमी दूर जोशीमठ में ITBP हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

टनल के 300 मीटर अंदर फंसे हुए थे
टनल से रेस्क्यू किए गए नेपाल के रहने वाले बसंत ने बताया कि जब मलबा अंदर आया, तब हम टनल में करीब 300 मीटर अंदर थे। हम वहां फंस गए थे। एक और वर्कर ने बताया कि वह चमोली में धाक गांव का रहने वाला है और तपोवन प्रोजेक्ट में काम करता है।

हॉस्पिटल के बेड से उन्होंने बताया कि हमने उम्मीद खो दी थी। फिर हमें थोड़ी रोशनी दिखी और सांस लेने के लिए कुछ हवा महसूस हुई। अचानक हममें से एक ने पाया कि उसके मोबाइल पर नेटवर्क था और फिर उसने हमारे अधिकारियों को फोन करके हमारी स्थिति के बारे में बताया।

अधिकारियों ने ITBP को खबर दी
अधिकारियों ने बताया कि प्रोजेक्ट GM ने बाद में स्थानीय अधिकारियों को खबर दी, जिन्होंने उन्हें बचाने के लिए ITBP रेस्क्यू टीम की व्यवस्था की। ITBP की टीमों ने रस्सियों, पुली और कारबाइनरों से लैस होकर एक खड़ी ढलान को ढहाया और रविवार शाम को सुरंग के संकरे इलाके से इन लोगों को बाहर निकाला।

छड़ों के जरिए सुरंग के अंदर आधे रास्ते चढ़ गए
जोशीमठ के रहने वाले विनोद सिंह पवार ने बताया कि वे छड़ों के जरिए सुरंग के अंदर आधे रास्ते तक चढ़ गए थे, लेकिन पानी का एक गुबार आने से वे फंस गए। उन्होंने कहा कि हम ITBP के शुक्रगुजार हैं।

पुल बहने की वजह से कटे गांवों तक राहत पहुंचा रहे
बॉर्डर फोर्स ने बाढ़ की वजह से कट गए कम से कम 9 गांवों में सोमवार को हवाई जहाज के जरिए खाने के पैकेट पहुंचाए। ITBP के प्रवक्ता विवेक कुमार पांडेय ने बताया कि रैणी पुल (जो कि बाढ़ में बह गया) के पार करीब 9 गांव हैं। जोशमठ में हमारे बेस से फूड पैकेट लेकर चॉपर्स उन गांवों तक राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं।



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