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Vijaya Ekadashi significance; Lord Sri Ram and vijaya ekadashi katha, vishnu puja vidhi, lord vishnu and puja | आज विजया एकादशी; भगवान श्रीराम ने भी किया था ये व्रत, सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाएं


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14 घंटे पहले

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  • स्कंद पुराण में एकादशी महात्म्य अध्याय में बताया है इस व्रत का महत्व

मंगलवार, 9 मार्च को फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। स्कंद पुराण के वैष्णव खंड में एकादशी महात्म्य अध्याय में सालभर की सभी एकादशियों के बारे में बताया गया है। फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है। अगर कोई बड़ा काम करना हो तो इस तिथि पर व्रत करने से उस काम में विजय मिल सकती है। इस दिन सूर्यास्त के बाद तुलसी की भी पूजा जरूर करनी चाहिए। तुलसी के पास दीपक जलाएं और परिक्रमा करें।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार विजया एकादशी का व्रत भगवान श्रीराम ने भी किया था। इस संबंध में कथा प्रचलित है कि रावण देवी सीता का हरण करके लंका ले गया था। तब श्रीराम वानर सेना के साथ समुद्र पार करके लंका पहुंचना चाहते थे। उस समय समुद्र पार करने का कोई उपाय नहीं मिल रहा था। तब बकदालभ्य मुनि ने श्रीराम से कहा था कि विजया एकादशी का व्रत करने से आपको हर काम में विजय मिल सकती है। तब श्रीराम ने विजया एकादशी का व्रत किया और समुद्र पार करके रावण वध किया।

इस एकादशी पर कौन-कौन से शुभ किए जा सकते हैं?

इस दिन भगवान विष्णु के लिए व्रत करना चाहिए। इस दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को धन और अनाज का दान करें। पूजा में सात प्रकार के अनाज जरूर रखें। अनाज पर जल कलश स्थापित करें। आम या अशोक के पत्तों से कलश को सजाएं।

भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। साथ ही, देवी लक्ष्मी की मूर्ति या फोटो भी रखें। भगवान का अभिषेक केसर मिश्रित दूध से करें। पीले फूल, फल, तुलसी आदि अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर आरती करें।

इन दिन शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाएं। चंदन से तिलक लगाएं। हार-फूल चढ़ाएं। बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल भी अर्पित करें। भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें।

हनुमानजी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। मंगलवार को एकादशी होने से इस दिन मंगल ग्रह के लिए पूजा करनी चाहिए। मंगल की पूजा शिवलिंग रूप में ही की जाती है। शिवलिंग पर लाल गुलाल, लाल गुलाब चढ़ाएं। मंगल ग्रह के लिए मसूर की दाल का दान करें।

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