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Viruses and bacteria buried under the layer of ice are at risk of becoming active as the temperature rises | तापमान बढ़ने के साथ बर्फ की परत के नीचे दबे वायरस और बैक्टीरिया सक्रिय होने का खतरा


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2 घंटे पहले

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जलवायु परिवर्तन के कारण हजारों वर्षों से जमी पर्माफ्रॉस्ट (मिट्टी, चट्टान और बर्फ से बनी धरती की परत) पिघल रही है और प्राचीन वायरस और बैक्टीरिया बाहर आ रहे हैंं। (प्रतीकात्मक तस्वीर) - Dainik Bhaskar

जलवायु परिवर्तन के कारण हजारों वर्षों से जमी पर्माफ्रॉस्ट (मिट्टी, चट्टान और बर्फ से बनी धरती की परत) पिघल रही है और प्राचीन वायरस और बैक्टीरिया बाहर आ रहे हैंं। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

इतिहास में हमेशा मनुष्य और बैक्टीरिया व वायरस साथ-साथ रहे हैं। बुबोनिक प्लेग से चेचक तक, हम इनका सामना करते रहे हैंं। लेकिन क्या होगा यदि अचानक हमारा सामना ऐसे घातक बैक्टीरिया और वायरस से हो जो हजारों वर्षों से धरती के नीचे दबे हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण हजारों वर्षों से जमी पर्माफ्रॉस्ट (मिट्टी, चट्टान और बर्फ से बनी धरती की परत) पिघल रही है और प्राचीन वायरस और बैक्टीरिया बाहर आ रहे हैंं। इनमें से अधिकतर के एक्टिव होने की आशंका नहीं है। लेकिन कुछ एक्टिव होकर खतरनाक रूप ले सकते हैं।

अगस्त 2016 में साइबेरियाई टुंड्रा के यमल प्रायद्वीप में एक 12 साल के लड़के की मौत एंथ्रेक्स से हो गई थी। 20 अन्य लोग संक्रमित हुए। इसकी शुरुआत इस घटना के 75 साल पहले हुई थी। तब एंथ्रेक्स से एक हिरन की मौत के बाद उसका शव मिट्टी और बर्फ में नीचे दब गया था। 2016 की भीषण गर्मी में यह परत पिघल गई और शव बाहर आ गया।

इसका बैक्टीरिया एंथ्रेक्स पानी और मिट्टी, और फिर खाद्य पदार्थ के जरिए बच्चे के शरीर में पहुंच गया। हालांकि एंथ्रेक्स की सबसे पहले पहचान 12वीं-13वीं सदी मंे की गई थी। यह अकेला मामला नहीं है, जैसे-जैसे ग्लोबल वार्मिंग बढ़ेगी पर्माफ्रॉस्ट की परत अधिक पिघलेगी। सामान्य परिस्थितियों में पर्माफ्रॉस्ट की परत हर गर्मियों में 50 सेमी पिघलती है। लेकिन अब ग्लोबल वार्मिंग पुरानी पर्माफ्रॉस्ट परतों के पिघलने का कारण बन रही है।

आर्कटिक सर्कल में तापमान दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में लगभग तीन गुना तेजी से बढ़ रहा है। पर्माफ्रॉस्ट तेजी से पिघलने से इसमें जमा कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन भी वातावरण में घुल रही है। 2020 की गर्मियों में साइबेरिया में अब तक का सबसे अधिक तापमान दर्ज किया गया था। उत्तरी शहर वेरखोयांस्क में तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।

इधर कुछ वर्षों पहले फ्रांस और रूस के वैज्ञानिकों ने 30,000 साल पुरानी साइबेरियाई पर्माफ्रॉस्ट से निकाले एक वायरस को पुनर्जीवित किया हैै। ये वायरस अमीबा को संक्रमित कर सकता था, इंसान को नहीं, लेकिन रूसी विज्ञान अकादमी के शोधकर्ताओं डॉ. एबर्जेल और डॉ. क्लेवेरी कहते हैं कि यह भी संभव है कि ऐसे ही कुछ वायरस इंसानों को संक्रमित कर सकते हैं। 2005 के एक अध्ययन में नासा के वैज्ञानिकों ने अलास्का के जमे तालाब में 32,000 वर्ष पुराने एक बैक्टीरिया को सफलतापूर्वक पुनर्जीवित किया था।

दुर्गम इलाकों में ड्रिलिंग से भी हो सकता है बीमारियों का संकट
आर्कटिक में समुद्री बर्फ पिघल रही है। साइबेरिया के उत्तरी तट तक समुद्र के रास्ते अब अधिक आसानी से पहुंचा जा सकता है। इन स्थानों पर औद्योगिक संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। ऐसा नहीं है कि सिर्फ पर्माफ्रास्ट की परत पिघलने से ही वायरस और बैक्टीरिया बाहर आएंगे। सोने और खनिजों के खनन और तेल व प्राकृतिक गैस के लिए ऐसे दुर्गम इलाकों में लगातार ड्रिलिंग की जा रही है। यदि धरती की उन परतों में विषाणु अभी भी हैं, तो वे आपदा का कारण बन सकते हैं।

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