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Waiting Up To 2.5 Years For Heart Surgery In Lucknow – हार्ट सर्जरी के लिए एक से ढाई साल तक का इंतजार, विशेषज्ञों की सलाह- घबराएं नहीं, रिस्क फैक्टर को कंट्रोल में रखें तो नहीं बढ़ेगी समस्या


हार्ट सर्जरी के लिए लखनऊ में लंबा इंतजार।

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चंद्रभान यादव
लखनऊ। राजधानी के चिकित्सा संस्थानों में 1000 से ज्यादा हृदय रोगी सर्जरी का इंतजार कर रहे हैं। एसजीपीजीआई, केजीएमयू और लोहिया संस्थान के कार्डियो वैस्कुलर एंड थोरेसिक सर्जरी विभाग में सर्जरी के लिए एक साल से लेकर ढाई साल तक की वेटिंग मिल रही है। जिन मरीजों की स्थिति ऐसी होती है कि उन्हें तत्काल सर्जरी की जरूरत है तो उन केस में तुरंत सर्जरी की जाती है। हालांकि इस सबके बावजूद रोजाना इन संस्थानों में कुल छह से आठ सर्जरी ही हो पाती है। ऐसे में मरीजों का सवाल होता है कि क्या इतनी लंबी वेटिंग से उनकी समस्या बढ़ेगी नहीं? हृदय रोग विशेषज्ञों का इस पर कहना है कि जब तक सर्जरी की तारीख नहीं मिलती, तब तक छोटी-छोटी सावधानियों के जरिए मरीज रिस्क फैक्टर को कंट्रोल में रख सकता है।
वॉल्व के खराब होने, धमनियों में थक्के जम जाने, धमनियों के क्षतिग्रस्त होने, दिल में छेद होने सहित कई ऐसी हृदय की समस्याएं होती हैं जिनमें सर्जरी की जरूरत होती है। पर, सर्जरी के नाम से ही घबराएं नहीं। घबराहट समस्या को कितना बढ़ा देता है, इस सवाल पर लोहिया संस्थान के सीवीटीएस विभाग के डॉ. डीके श्रीवास्तव बताते हैं कि हृदय रोगियों पर किए गए एक सर्वे में यह बात सामने आई कि सालभर से ज्यादा की वेटिंग मिलने पर 20 से 25 फीसदी मरीजों में नींद कम आने, अवसाद में चले जाने, घबराहट होने सहित अन्य कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं। इस वजह से ही उनकी बीमारी बढ़ जाती है। इस दौरान देखा गया कि हार्ट सर्जरी का इंतजार करने वाले मरीजों में करीब 10 फीसदी को बीच में ही सर्जरी प्रबंधन करना पड़ा।
ऐसे कर सकते हैं रिस्क फैक्टर को कंट्रोल
घबराएं नहीं, क्योंकि ये खतरे को बढ़ा देता है
रिस्क फैक्टर को कैसे कंट्रोल में रखा जा सकता है, इस सवाल पर लोहिया संस्थान के सीवीटीएस विभाग के डॉ. डीके श्रीवास्तव कहते हैं कि डॉक्टर के सर्जरी की जरूरत बताए जाने पर घबराएं नहीं। अगर फौरन सर्जरी की जरूरत है तो चिकित्सक उस पर तुरंत फैसला लेता है। अगर तारीख आगे की दी जा रही है तो इसका मतलब है कि फौरन सर्जरी की जरूरत नहीं है। इसलिए धैर्य रखें।
वॉल्व सिकुड़ा है तो पानी कम पीएं, नमक भी कम खाएं
डॉ. डीके श्रीवास्तव बताते हैं कि अगर सर्जरी के लिए छह माह से अधिक का समय मिल रहा है तो मरीज को नमक का सेवन कम कर देना चाहिए। पानी का सेवन डॉक्टर के बताए अनुसार करें। अगर वॉल्व सिकुड़ने की समस्या है तो दिनभर में एक लीटर से ज्यादा पानी नहीं पीएं। पानी ज्यादा पीने से हार्ट पर लोड बढ़ेगा जो वॉल्व की समस्या को बढ़ाएगा। क्या कम पानी पीना अन्य समस्याओं को नहीं बढ़ाएगा, इस सवाल पर वह कहते हैं कि थोड़ी समस्या तो बढ़ेगी पर रिस्क फैक्टर कंट्रोल में रहेगा। खानपान नियंत्रित रखें। वसा युक्त चीजों का सेवन कम से कम करें ।
दवाएं जरूर खाएं, इससे समस्या बढ़ने नहीं पाएगी
एसजीपीजीआई के सीवीटीएस विभागाध्यक्ष प्रो. निर्मल गुप्ता बताते हैं कि वेटिंग के दौरान मर्ज को दवाओं के जरिए नियंत्रित रखने का प्रयास किया जाता है। इसलिए वेटिंग के दौरान डॉक्टर के बताए अनुसार दवाएं लेते रहें। कई बार वेटिंग तीन से चार साल तक की हो सकती है, लेकिन जब मरीज की स्थिति गंभीर होती है तो तत्काल सर्जरी प्लान की जाती है। वह बताते हैं, एक मरीज दो साल से वेटिंग में था, लेकिन जांच के दौरान देखा गया कि उसकी जान को खतरा है तो दो दिन पहले उसे भर्ती कर लिया गया और सर्जरी कर दी गई।
सुविधाओं को बढ़ाने की जरूरत
वेटिंग को कैसे कम किया जाए इस सवाल पर केजीएमयू के सीवीटीएस विभागाध्यक्ष डॉ. एसके सिंह का कहना है कि इसके लिए संसाधन बढ़ाने की जरूरत है। जिन मरीजों को तत्काल सर्जरी की जरूरत होती है, उन्हें रोका नहीं जाता है। मरीजों की जान बचाना प्राथमिकता है, लेकिन हर मरीज की तत्काल सर्जरी हो पाना संभव नहीं होता है। यही वेटिंग की वजह बनती है।
हृदय संस्थान खुलें तो बने बात
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानाना है कि जिस तरह से पूरे प्रदेश में हृदय रोगियों की संख्या बढ़ रही है, उसके अनुसार राजधानी में डेडिकेटेड हृदय रोग संस्थान बनाने की जरूरत है। कैंसर संस्थान की तर्ज पर हृदय रोग संस्थान बनाकर मरीजों को राहत दी जा सकती है। इससे बड़ा फायदा यह होगा कि प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा हृदय रोग विशेषज्ञ तैयार हो सकेंगे। रोग की शुरुआत होते ही इलाज शुरू हो जाएगा। इससे मर्ज को दवाओं के जरिए रोका जा सके गा। हृदय रोग से बचने को लेकर नए सिरे से जागरूकता अभियान की भी जरूरत है।

चंद्रभान यादव

लखनऊ। राजधानी के चिकित्सा संस्थानों में 1000 से ज्यादा हृदय रोगी सर्जरी का इंतजार कर रहे हैं। एसजीपीजीआई, केजीएमयू और लोहिया संस्थान के कार्डियो वैस्कुलर एंड थोरेसिक सर्जरी विभाग में सर्जरी के लिए एक साल से लेकर ढाई साल तक की वेटिंग मिल रही है। जिन मरीजों की स्थिति ऐसी होती है कि उन्हें तत्काल सर्जरी की जरूरत है तो उन केस में तुरंत सर्जरी की जाती है। हालांकि इस सबके बावजूद रोजाना इन संस्थानों में कुल छह से आठ सर्जरी ही हो पाती है। ऐसे में मरीजों का सवाल होता है कि क्या इतनी लंबी वेटिंग से उनकी समस्या बढ़ेगी नहीं? हृदय रोग विशेषज्ञों का इस पर कहना है कि जब तक सर्जरी की तारीख नहीं मिलती, तब तक छोटी-छोटी सावधानियों के जरिए मरीज रिस्क फैक्टर को कंट्रोल में रख सकता है।

वॉल्व के खराब होने, धमनियों में थक्के जम जाने, धमनियों के क्षतिग्रस्त होने, दिल में छेद होने सहित कई ऐसी हृदय की समस्याएं होती हैं जिनमें सर्जरी की जरूरत होती है। पर, सर्जरी के नाम से ही घबराएं नहीं। घबराहट समस्या को कितना बढ़ा देता है, इस सवाल पर लोहिया संस्थान के सीवीटीएस विभाग के डॉ. डीके श्रीवास्तव बताते हैं कि हृदय रोगियों पर किए गए एक सर्वे में यह बात सामने आई कि सालभर से ज्यादा की वेटिंग मिलने पर 20 से 25 फीसदी मरीजों में नींद कम आने, अवसाद में चले जाने, घबराहट होने सहित अन्य कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं। इस वजह से ही उनकी बीमारी बढ़ जाती है। इस दौरान देखा गया कि हार्ट सर्जरी का इंतजार करने वाले मरीजों में करीब 10 फीसदी को बीच में ही सर्जरी प्रबंधन करना पड़ा।

ऐसे कर सकते हैं रिस्क फैक्टर को कंट्रोल

घबराएं नहीं, क्योंकि ये खतरे को बढ़ा देता है

रिस्क फैक्टर को कैसे कंट्रोल में रखा जा सकता है, इस सवाल पर लोहिया संस्थान के सीवीटीएस विभाग के डॉ. डीके श्रीवास्तव कहते हैं कि डॉक्टर के सर्जरी की जरूरत बताए जाने पर घबराएं नहीं। अगर फौरन सर्जरी की जरूरत है तो चिकित्सक उस पर तुरंत फैसला लेता है। अगर तारीख आगे की दी जा रही है तो इसका मतलब है कि फौरन सर्जरी की जरूरत नहीं है। इसलिए धैर्य रखें।

वॉल्व सिकुड़ा है तो पानी कम पीएं, नमक भी कम खाएं

डॉ. डीके श्रीवास्तव बताते हैं कि अगर सर्जरी के लिए छह माह से अधिक का समय मिल रहा है तो मरीज को नमक का सेवन कम कर देना चाहिए। पानी का सेवन डॉक्टर के बताए अनुसार करें। अगर वॉल्व सिकुड़ने की समस्या है तो दिनभर में एक लीटर से ज्यादा पानी नहीं पीएं। पानी ज्यादा पीने से हार्ट पर लोड बढ़ेगा जो वॉल्व की समस्या को बढ़ाएगा। क्या कम पानी पीना अन्य समस्याओं को नहीं बढ़ाएगा, इस सवाल पर वह कहते हैं कि थोड़ी समस्या तो बढ़ेगी पर रिस्क फैक्टर कंट्रोल में रहेगा। खानपान नियंत्रित रखें। वसा युक्त चीजों का सेवन कम से कम करें ।

दवाएं जरूर खाएं, इससे समस्या बढ़ने नहीं पाएगी

एसजीपीजीआई के सीवीटीएस विभागाध्यक्ष प्रो. निर्मल गुप्ता बताते हैं कि वेटिंग के दौरान मर्ज को दवाओं के जरिए नियंत्रित रखने का प्रयास किया जाता है। इसलिए वेटिंग के दौरान डॉक्टर के बताए अनुसार दवाएं लेते रहें। कई बार वेटिंग तीन से चार साल तक की हो सकती है, लेकिन जब मरीज की स्थिति गंभीर होती है तो तत्काल सर्जरी प्लान की जाती है। वह बताते हैं, एक मरीज दो साल से वेटिंग में था, लेकिन जांच के दौरान देखा गया कि उसकी जान को खतरा है तो दो दिन पहले उसे भर्ती कर लिया गया और सर्जरी कर दी गई।

सुविधाओं को बढ़ाने की जरूरत

वेटिंग को कैसे कम किया जाए इस सवाल पर केजीएमयू के सीवीटीएस विभागाध्यक्ष डॉ. एसके सिंह का कहना है कि इसके लिए संसाधन बढ़ाने की जरूरत है। जिन मरीजों को तत्काल सर्जरी की जरूरत होती है, उन्हें रोका नहीं जाता है। मरीजों की जान बचाना प्राथमिकता है, लेकिन हर मरीज की तत्काल सर्जरी हो पाना संभव नहीं होता है। यही वेटिंग की वजह बनती है।

हृदय संस्थान खुलें तो बने बात

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानाना है कि जिस तरह से पूरे प्रदेश में हृदय रोगियों की संख्या बढ़ रही है, उसके अनुसार राजधानी में डेडिकेटेड हृदय रोग संस्थान बनाने की जरूरत है। कैंसर संस्थान की तर्ज पर हृदय रोग संस्थान बनाकर मरीजों को राहत दी जा सकती है। इससे बड़ा फायदा यह होगा कि प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा हृदय रोग विशेषज्ञ तैयार हो सकेंगे। रोग की शुरुआत होते ही इलाज शुरू हो जाएगा। इससे मर्ज को दवाओं के जरिए रोका जा सके गा। हृदय रोग से बचने को लेकर नए सिरे से जागरूकता अभियान की भी जरूरत है।



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