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Where, how, when and with what things you can worship Shiva in Sawan | शिव पूजा के कायदे सावन में कहां, कैसे, कब और किन चीजों से कर सकते हैं शिव पूजा


16 घंटे पहले

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  • यजुर्वेद में बताया है कि कुछ खास चीजों से शिवजी का अभिषेक करने से सुख-समृद्धि और उम्र बढ़ती है

सावन महीना 22 अगस्त तक रहेगा। स्कंद और शिव महापुराण के मुताबिक इस महीने में शिव पूजा से हर तरह के दोष खत्म हो जाते हैं। ग्रंथों में शिव पूजा के लिए कुछ खास चीजें और महत्वपूर्ण जगहों की जानकारी दी गई है। जिससे पूजा का पूरा फल जल्दी ही मिलता है। यजुर्वेद में बताया गया है कि शिवजी का अभिषेक कुछ खास चीजों से करने पर धन लाभ, सुख-समृद्धि और लंबी उम्र के साथ बीमारियों से भी छुटकारा मिलता है।

पुराणों में शिव आराधना से जुड़े कुछ नियम हैं। जिनमें बताया गया है कि शिवजी पर जल चढ़ाते समय और पूजा के वक्त किस दिशा में बैठना चाहिए, किन चीजों से अभिषेक किया जाना चाहिए, कौन से फूल और कौन सी पत्तियां शिवजी को चढ़ती हैं और पूजा में किन चीजों की मनाही है। साथ ही ये भी बताया गया है कि सावन महीने में किस दिन शिव पूजा करने से क्या फल मिलेगा।

शिव पूजा में ध्यान रखने वाली बातें
शिवलिंग की पूजा करते वक्त सामने बैठना चाहिए। यानी पूजा करने वाले का मुंह पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। शिवलिंग की आधी ही परिक्रमा करनी चाहिए। जलाधारी को लांघना नहीं चाहिए। शिवलिंग पर गर्म पानी नहीं चढ़ाना चाहिए। कटे-फटे फूल और पत्र भी नहीं चढ़ाने चाहिए। इसके अलावा शिवजी को हल्दी नहीं चढ़ाई जाती और केतकी, कुंद, शिरीष और कपित्थ फूल नहीं चढ़ाए जाते हैं।

किन चीजों से कर सकते हैं अभिषेक
शिवलिंग और भगवान की मूर्ति का अभिषेक गंगाजल से करना बहुत शुभ माना गया है। इसके अलावा शुद्ध जल या उसमें दूध मिलाकर भी अभिषेक करने का विधान है। पानी में चंदन मिलाकर शिवजी का अभिषेक करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पुराणों में दूध, दही, घी, शहद और पंचामृत से अभिषेक करने की बात कही है। वहीं यजुर्वेद में बताया गया है कि फलों के रस से भगवान शिव का अभिषेक करने पर बीमारियां दूर होती हैं।

कौन से फूल और पत्ते चढ़ाएं
भगवान शिव को सफेद मदार, कनेर, मौलसिरी और धतूरे के फूल खासतौर से पसंद हैं। इनके अलावा कमल, चंपा, गुलाब और गेंदे के फूल भी चढ़ाएं जा सकते हैं। शिव पूजा में बिल्वपत्र को बहुत खास माना गया है। इसके साथ ही धतूरे के पत्ते, शमी पेड़ के पत्ते, नीलकमल, भटकटैया, अपामार्ग, खस, आम की मंजरी और तुलसी पत्र भी भगवान शिव को चढ़ाए जाते हैं।

सावन में शिव पूजा के लिए खास जगह
स्कंद और शिवमहापुराण के मुताबिक सावन में तुलसी, पीपल या बरगद के पेड़ के पास बैठकर शिव पूजा करने का विधान है। साथ ही नदी, तालाब या समुद्र किनारे बैठकर की गई शिव पूजा का पूरा फल जल्दी ही मिलता है। इनके अलावा किसी मंदिर, गुरु आश्रम, तीर्थ या धार्मिक स्थल पर की गई शिव पूजा को भी पूर्ण माना गया है। हालांकि देश-काल और परिस्थिति का विचार करते हुए ग्रंथों में भी बताया गया है कि प्राकृतिक आपदा या महामारी के कारण इन जगहों पर शिव पूजा न भी हो पाए तो घर पर की गई पूजा का भी उतना ही फल मिलता है।

सावन में शिव पूजा के दिन और उनका फल
सावन महीने का हर दिन अपने आप में खास होता है। इस महीने में सोमवार से रविवार तक यानी हर दिन शिव पूजा का अपना अलग महत्व है। ग्रंथों में कहा गया है कि सावन महीने का हर दिन पर्व होता है। इसलिए रविवार को की गई शिव पूजा से पाप नाश होता है। सोमवार को धन लाभ, मंगलवार को स्वस्थ्य लाभ और रोग निवारण, बुधवार को पुत्र प्राप्ति, गुरुवार को की गई पूजा से लंबी उम्र मिलती है। वहीं, शुक्रवार और शनिवार को की गई शिव पूजा से हर तरह के सुख मिलते हैं।

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