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Work from home or holiday; Work on virus, yet the infection could not touch for 13 months, in CCMB lab, hyderabad | वर्क फ्रॉम होम न छुट्टी; वायरस पर ही काम, फिर भी 13 महीने से छू नहीं सका संक्रमण


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हैदराबाद17 मिनट पहलेलेखक: प्रमोद त्रिवेदी

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घंटों साथ बिताने के बाद भी 660 लोगों में से एक भी कोरोना संक्रमण का मामला नहीं। - Dainik Bhaskar

घंटों साथ बिताने के बाद भी 660 लोगों में से एक भी कोरोना संक्रमण का मामला नहीं।

  • हैदराबाद की सीसीएमबी लैब का स्टाफ कोरोना पर जीत का उदाहरण भी

दुनिया के हर वायरस (विषाणु) को बनाने और उस पर प्रयोग करने वाली विश्वस्तरीय लैबोरेट्री सेल्यूलर और आणविक जीव विज्ञान केंद्र (सीसीएमबी) हैदराबाद। यहां 60 वैज्ञानिक, 150 पीएचडी शोधकर्ता, 450 सहयोगी स्टाफ यानी कुल 660 लोग रोज साथ काम करते हैं। कोरोना के समय में भी यहां न तो वर्क फ्रॉम होम है और न कोई अवकाश। कैंटीन में 24 घंटे मिलने वाले खाने से ही सबका पेट भरता है।

सीसीएमबी में इन दिनों कोरोना वायरस पर रिसर्च चल रहा है। ये वायरस के हर म्यूटेंट का पता करते हैं और उसे लैब में बनाते हैं। हजारों मिलियन वायरस बनाना। उन पर रिसर्च करना, वैक्सीन कंपनियों की मदद करना, इनका रोज का काम है। लेकिन पूरे देश के लिए प्रेरणा देने वाली बात यह है कि यहां पिछले 13 महीनों में एक भी व्यक्ति कोरोना संक्रमित नहीं हुआ। न वैज्ञानिक, न युवा रिसर्चर और न ही सहयोगी स्टाफ।

यहां अब तक कोरोना संक्रमण का एक भी मामला नहीं आया है। हालांकि ऐसा भी नहीं है कि स्टाफ के सभी सदस्यों को किसी स्कैनर से कोरोना-मुक्त किया जाता हो या कोई दवा दी जाती है। असल में इसके पीछे 13 महीने पहले दीवार पर लिखे एक स्लोगन का पालन करना है- ‘सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क लगाना और हाथ धोना।’ बस, इसके अलावा कुछ नहीं। पूरी टीम ने 13 महीने से इसे ही आदत बना चुकी है।

आखिर इन्होंने ऐसा कैसे किया, तीन उदाहरण से समझिए

पहला – सीसीएमबी का हिस्सा है सीडीएफडी (सेंटर फॉर डीएनए फिंगरप्रिंट एंड डायग्नोस्टिक)। यहां डायरेक्टर हैं प्रोफेसर थंगराज। उन्होंने मिलने के लिए चेम्बर में नहीं, मीटिंग रूम में बुलाया। यहां भी तीन मीटर के फासले पर बैठक व्यवस्था की। पिछले 13 महीने से ऑफिस में 16 घंटे काम करते हैं। लेकिन कोरोना के कारण किसी को मीटिंग के लिए मना नहीं करते।

दूसरा – साइंटिस्ट डॉ पूरन सिंह सिजवाली और डॉ अर्चना भारद्वाज का फोटो लेना था। जब दोनों से पांच सेंकड के लिए मास्क हटाने को कहा तो इन्होंने पहले केबिन का गेट खुलवाया। वेंटिलेशन शुरू हुआ तो तीन मीटर की दूरी पर खड़े हुए। कहा, ‘आप फोटो लेने के लिए तैयार हो जाएं। इसके बाद पांच सेकंड के लिए मास्क हटाया।’

तीसरा – हर लैब के प्रोटोकॉल के साथ कैंटीन के बाहर खाना खाने के भी अलिखित नियम हैं। कैंटीन से खाने के बंद पैकेट दिए जाते हैं। हर टेबल के बीच में तीन मीटर का फासला है। हर टेबल का व्यास दो मीटर है। इससे टेबल के चारों ओर खड़े लोग एक-दूसरे से तीन फीट दूर रहते हैं। फिर सब खाना खाते हैं।

15 दिन सावधानी, कोरोना हार जाएगा
वैज्ञानिक अर्चना भारद्वाज कहती हैं, ‘हम भी आम इंसान की तरह परिवार से मिलते हैं और ऑफिस-लैब में काम करते हैं। लेकिन सावधानी नहीं छोड़ते। हमारा ही नहीं, हर रिसर्च यही कहता है कि केवल 15 दिन के लिए सभी लोग सही से मास्क पहन लें। आपसी दूरी रखें और सैनिटाइज करते रहें। समारोहों में न जाएं। कोरोना बिना किसी वैक्सीन और दवा के समाप्त हो जाएगा

कोरोना हवा में, तो खाना-पानी कैसे?
कोरोना के कण हवा में रहते हैं, तो क्या ऑफिस में मास्क हटाकर पानी पीना या खाना सुरक्षित है? इस पर अर्चना भारद्वाज शिवा और जीनोम सीक्वेसिंग एक्सपर्ट डॉ तेज सौपाटी कहते हैं, हम सभी मास्क लगाए हैं और डिस्टेंसिंग मेंटेन कर रहे हैं। अगर सभी मास्क ने लगाया है तो एक्टिव वायरस किसी भी स्थिति में हवा में कैसे निकलेगा। बंद जगह में ग्रुप में खाना नहीं खाना चाहिए।

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